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50 बाल विवाह पर लगी रोक, बच्चियों ने कहा- हमें पढ़ना है, शादी नहीं करनी

By Admin|24 Apr 2026, 7:51 PM
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  बूंदी

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राजस्थान के बूंदी जिले में मासूम बचपन को कुचलने की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है. यहां नीम का खेड़ा गांव में 10 से 13 साल की 7 बच्चियों को 'नए घर' ले जाने का लालच देकर मंडप में बैठा दिया गया. सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली इन बच्चियों को जब एहसास हुआ कि उनका बाल विवाह कराया जा रहा है तो वे फूट-फूट कर रोने लगीं.

मंडप में गूंजी मासूमों की सिसकियां
बच्चियों ने काउंसलिंग में अधिकारियों को बताया कि परिजनों ने उन्हें कुछ दिन के लिए दूसरे घर जाने की बात कही थी. लेकिन जब मंडप में पंडित ने फेरे शुरू कराए और उन्हें एक अजनबी युवक के साथ बैठाया गया तो उनके होश उड़ गए. खुशी से सजाए गए मंडप में मासूमों की सिसकियां गूंजने लगीं. समाज की भीड़ के आगे उनकी आवाज दब रही थी लेकिन तभी प्रशासन वहां देवदूत बनकर पहुंच गया.

टीम का एक्शन और 50 शादियों पर रोक
सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की टीम ने मौके पर पहुंचकर इन सात बाल विवाह को तुरंत रुकवा दिया. बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने बताया कि हाल ही में चलाए गए अभियान के तहत 14 बाल विवाह रोके गए हैं. नैनवा, हिंडोली, दबलाना जैसे गांवों में दबिश दी गई. पिछले 4 महीनों में ही बूंदी प्रशासन ने 50 मासूमों की शादियां रुकवाकर उनकी जिंदगी बर्बाद होने से बचाई है.

परंपरा के नाम पर बचपन की बलि
यह मामला भील समाज से जुड़ा है जहां बच्चों के रिश्ते जन्म के समय ही तय कर दिए जाते हैं और आखातीज जैसे मौकों पर एक साथ कई शादियां कर दी जाती हैं. प्रशासन की सख्त कार्रवाई के बाद अब समाज में डर का माहौल है. सभी मामलों में कोर्ट से स्टे प्राप्त कर लिया गया है जिससे आगे इन शादियों को नहीं कराया जा सकेगा.

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"हमें शादी नहीं करनी, हमें पढ़ना है"
जब बाल कल्याण समिति के सामने माता-पिता अपनी बच्चियों को वापस ले जाने के लिए गिड़गिड़ाने लगे तो बच्चियों ने गजब की हिम्मत दिखाई. डरी-सहमी होने के बावजूद उन्होंने साफ कह दिया कि वे अपने परिजनों के साथ नहीं जाना चाहतीं. बच्चियों का सिर्फ एक ही सपना था कि उन्हें आगे पढ़ना है. प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बाल विवाह करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी और समाज को भी इस कुरीति के खिलाफ जागरूक होना होगा.

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