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CG : दूरस्थ अबूझमाड़ से मरीज को प्राकृतिक आपदाओं से निकालकर सुरक्षित पहुंचाया गया अस्पताल

By kadwaghut|21 Aug 2026, 5:01 PM
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दुर्गम अबूझमाड़ में 29वीं वाहिनी आईटीबीपी बनी जीवन रक्षक

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नारायणपुर, अबूझमाड़ के दुर्गम और घने जंगलों में तैनात 29वीं वाहिनी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान सुरक्षा प्रहरी के साथ-साथ जरूरतमंद ग्रामीणों के लिए जीवन रक्षक की भूमिका भी निभा रहे हैं। बारिश के मौसम में क्षेत्र के कच्चे और दुर्गम रास्ते बेहद खराब हो जाने से कई गांवों तक चार पहिया वाहन पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे कठिन हालात में आईटीबीपी के जवान ग्रामीणों की मदद के लिए लगातार आगे आ रहे हैं। इसी मानवीय पहल का उदाहरण 18 अगस्त को देखने को मिला। अबूझमाड़ के कुमनार गांव की 17 वर्षीय युवती करू, पुत्री मंगली, पिछले 12 दिनों से अत्यधिक मासिक रक्तस्राव से पीडि़त थी। इसकी सूचना पोस्ट कुमनार स्थित 29वीं वाहिनी आईटीबीपी को मिली।


सूचना मिलते ही निरीक्षक संतोष कुमार झा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पोस्ट कुमनार में युवती का प्राथमिक चिकित्सकीय परीक्षण कराया। चिकित्सकीय परामर्श के बाद उसे तत्काल उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओरछा ले जाने की सलाह दी गई। मौसम और दुर्गम रास्तों की चुनौती के बावजूद आईटीबीपी ने तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया। सहायक उप निरीक्षक रसपाल सिंह के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई, जिसमें आठ जवान और एक मेडिक्स शामिल थे। टीम पोस्ट कुमनार से लगभग 500 मीटर तक पैदल चलकर युवती को आगे मोटरसाइकिल से ले गई।


रेस्क्यू टीम पांच मोटरसाइकिलों के साथ पोस्ट कुमनार से पोस्ट दिवालूर पहुंची और वहां से पोस्ट बोटेर की ओर रवाना हुई। बारिश से फिसलन भरे कच्चे रास्तों, घने जंगल, ऊबड़-खाबड़ मार्ग और जगह-जगह जलभराव के बीच टीम लगातार आगे बढ़ती रही। लगभग शाम 5रू30 बजे टीम पोस्ट कुदमेल और अबूझमाड़ क्षेत्र के बीच स्थित नाले तक पहुंची। नाले के आगे का रास्ता एंबुलेंस से तय किया गया। जहां तक एंबुलेंस पहुंचना संभव था, वहां तक आईटीबीपी की एंबुलेंस ने युवती को अपने साथ लिया और उसे ओरछा अस्पताल पहुंचाया।

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पूरे रेस्क्यू अभियान के दौरान आईटीबीपी के मेडिक्स ने युवती की चिकित्सकीय स्थिति पर लगातार नजर रखी और उसे सुरक्षित रखा। कठिन रास्तों एवं खराब मौसम के बावजूद टीम ने देर शाम तक युवती को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओरछा पहुंचाया, जहां उसे आगे के उपचार के लिए भर्ती कराया गया। अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में, जहां सड़क और परिवहन सुविधाएं सीमित हैं, 29वीं वाहिनी आईटीबीपी की रेस्क्यू टीम का यह प्रयास ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत का संदेश है। युवती के परिजनों ने कठिन समय में मदद पहुंचाने के लिए आईटीबीपी के जवानों का आभार व्यक्त किया। आईटीबीपी के जवानों ने एक बार फिर साबित किया कि उनकी जिम्मेदारी केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय स्थानीय ग्रामीणों की सहायता और मानव जीवन की रक्षा करना भी उनके कर्तव्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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