छत्तीसगढ़

बस्तर में डबरी ने किया कमाल, किसान सोनधर को मिला पानी का संबल और आजीविका को नई उड़ान

By Admin|14 Jul 2026, 6:22 PM
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डबरी निर्माण से बदली बस्तर के किसान सोनधर की तकदीर

जल संरक्षण के साथ आजीविका को मिली नई उड़ान

रायपुर
छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना “विकसित भारत -गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)” ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन का एक बड़ा जरिया बनकर उभर रही है। इस योजना के तहत बस्तर जिले के विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत खोटलापाल में कराए गए डबरी (छोटे तालाब) निर्माण कार्य ने न केवल जल संकट को दूर किया है, बल्कि स्थानीय किसान की जिंदगी में भी समृद्धि के नए रंग भर दिए हैं। ग्राम खोटलापाल निवासी किसान श्री सोनधर की भूमि पर निर्मित यह डबरी आज पूरे क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और ग्रामीण विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है।

सिंचाई के संकट से मिली मुक्ति, अब ले रहे हैं अतिरिक्त फसलें

         सोनधर ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले वर्षा का अधिकांश पानी बहकर बर्बाद हो जाता था, जिसके कारण गर्मी के मौसम में खेतों की सिंचाई के लिए भारी संकट का सामना करना पड़ता था। लेकिन डबरी निर्माण के बाद अब बारिश के पानी का प्रभावी ढंग से संचयन हो रहा है। खेतों को अब समय पर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल रहा है।
डबरी में पानी की उपलब्धता से सोनधर को अब साल में अतिरिक्त फसल लेने का सुनहरा अवसर मिला है। पानी की प्रचुरता से पशुपालन और बाड़ी (सब्जी उत्पादन) विकास जैसी गतिविधियों को भी नया जीवन मिला है।

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सिर्फ सिंचाई नहीं, मछली पालन से बढ़ी अतिरिक्त आय

        यह डबरी केवल खेतों की प्यास बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सोनधर के लिए आजीविका का एक मजबूत अतिरिक्त साधन भी बन गई है। लाभार्थी किसान श्री सोनधर ने कहा कि अब इस डबरी में सफलतापूर्वक मछली पालन किया जा रहा है, जिससे परिवार को हर साल अच्छी अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। आने वाले समय में यहाँ बतख पालन शुरू करने की भी योजना है, जिससे आमदनी के स्रोत और बढ़ेंगे।

भूजल स्तर में सुधार और स्थानीय स्तर पर रोजगार

       इस डबरी निर्माण का सकारात्मक प्रभाव केवल एक किसान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका लाभ पूरे ग्रामीण परिवेश को मिल रहा है। डबरी के कारण आसपास के क्षेत्र का भूजल स्तर (वाटर टेबल) सुधरा है, जिससे निकटवर्ती कुओं और हैंडपंपों में पानी की उपलब्धता बढ़ गई है। खेतों की मिट्टी में नमी बनी रहने से आसपास की फसलों को भी लाभ हो रहा है। डबरी निर्माण के दौरान ग्राम पंचायत के जॉब कार्डधारी ग्रामीणों को गाँव में ही रोजगार मिला, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े और काम की तलाश में होने वाले पलायन पर प्रभावी रोक लगी।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

       खोटलापाल में हुआ यह सफल प्रयोग यह साबित करता है कि यदि जल संरक्षण के कार्यों को जनभागीदारी और सरकारी योजनाओं के समन्वय से लागू किया जाए, तो खेती, पर्यावरण और ग्रामीण आजीविकाकृतीनों को एक साथ सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

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