उत्तर प्रदेशराज्‍य

डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती पर लखनऊ में श्रद्धांजलि कार्यक्रम, कई नेता रहे मौजूद

By Admin|06 Jul 2026, 3:01 PM
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लखनऊ
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भारत माता का महान सपूत, प्रखर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, शिक्षाविद् बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद-370 के खिलाफ नेहरू सरकार की तुष्टिकरण की वह नीति, जो देश की एकता और अखंडता को चुनौती दे रही थी, डॉ. मुखर्जी ने उसके खिलाफ शंखनाद किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भाजपा सरकार ने 2019 में कश्मीर में अनुच्छेद-370 समाप्त कर डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार किया और कश्मीर में भी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान को प्रभावी ढंग से लागू किया गया।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी 125वीं जयंती पर उनके प्रति श्रद्धा निवेदित की। सीएम योगी ने सिविल अस्पताल स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्पार्चन भी किया।

पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा है तो उसमें डॉ. मुखर्जी की भूमिका अहम
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आजादी के आंदोलन में प्रमुखता से जुड़े। बंगाल को जब पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की चालें चली जा रही थीं, तो श्यामा प्रसाद मुखर्जी इसके खिलाफ खड़े हुए। आज का पश्चिम बंगाल यदि भारत का हिस्सा है तो इसमें जिन महान नेताओं ने खुद को समर्पित कर आंदोलन का हिस्सा बनाया और इसके खिलाफ आवाज बुलंद की, उसमें डॉ. मुखर्जी का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। उन्होंने स्वतंत्र भारत के मंत्री के रूप में खाद्य नीति व उद्योग नीति को प्रमुखता से लागू किया

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देश की अखंडता के लिए सरकार से भी अलग हो गए थे डॉ. मुखर्जी
सीएम ने कहा कि जब नेहरू सरकार की तुष्टिकरण की नीति देश की अखंडता के सामने चुनौती बनी तो सत्ता की राजनीति को तिलांजलि देते हुए वे सरकार से अलग हो गए। भारतीय जनसंघ के गठन के बाद संस्थापक अध्यक्ष के रूप में राष्ट्र की अखंडता के लिए उन्होंने ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान व दो निशान नहीं चलेगा’ का उद्घोष करते हुए कश्मीर की परमिट प्रणाली का विरोध किया। इस पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। 1953 में कश्मीर में ही उनका बलिदान हो गया।

डॉ. मुखर्जी को आदर्श मानने वाली भाजपा पश्चिम बंगाल में बनी शासन का हिस्सा
सीएम योगी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने जिस पश्चिम बंगाल को पाकिस्तान के खूनी पंजे से बचाने में महती भूमिका का निर्वहन किया, वही पश्चिम बंगाल आज श्यामा प्रसाद मुखर्जी को अपना आदर्श मानने वाली भाजपा के शासन का हिस्सा बना है। डबल इंजन सरकार पश्चिम बंगाल में डॉ. मुखर्जी से जुड़े स्थलों के पुनरुद्धार के लिए कार्य कर रही है

महज 33 वर्ष की आयु में कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में दीं सेवाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 1901 में बंगाल में हुआ था। उच्च शिक्षा अर्जित करने के साथ ही प्राध्यापक के रूप में उन्होंने जीवन की शुरुआत की। महज 33 वर्ष की उम्र में उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में महत्वपूर्ण सेवाएं दीं।

कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, प्रदेश सरकार के मंत्री सूर्य प्रताप शाही, स्वतंत्र देव सिंह, कपिलदेव अग्रवाल, विधायक नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य मुकेश शर्मा, पूर्व विधायक सुरेश तिवारी, भाजपा के महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी आदि मौजूद रहे।

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