मध्य प्रदेशराज्‍य

डॉ. प्रतिभा तिवारी ने महिला किसान वर्ष 2026 में उत्पादन से उपयोग तक की प्रक्रिया पर संपर्क, परिचय और सवेक्षण किया

By Admin|16 Apr 2026, 1:32 PM
f X W

महिला किसान वर्ष 2026 में डाॅ0 प्रतिभा तिवारी जी ने किया उत्पादन से उपयोग तक की प्रक्रिया में संपर्क/परिचय/चर्चा एवं सवेक्षण  

Advertisement
Advertisement

टीकमगढ़

दिनांक 15/04/2026 को भारतीय स्त्रीशक्ति मध्यप्रदेश के द्वारा टीकमगढ़ के मिनोरा गाँव में “महिला किसान वर्ष 2026” में भारतीय स्त्री शक्ति मध्यप्रदेष की प्रदेश अध्यक्ष-डाॅ0 प्रतिभा तिवारी ने उत्पादन से उपयोग तक की प्रक्रिया में संपर्क/परिचय/चर्चा एवं सवेक्षण  किया जिसमें आपने कहा कि-उत्पादन से उपयोग तक की यह यात्रा केवल वस्तु के लेन-देन की नहीं, बल्कि विश्वास के निर्माण की प्रक्रिया है। यदि हमारा संपर्क मजबूत है, परिचय स्पष्ट है, चर्चा सकारात्मक है और सर्वेक्षण ईमानदार है, तो वह उत्पाद न केवल सफल होगा बल्कि समाज में अपनी एक अमिट छाप छोड़ेगा। उपयोगकर्ता की संतुष्टि ही किसी भी उत्पादन की वास्तविक सफलता है। उपयोगकर्ता के अनुभव को महिला किसान से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। महिला किसान खुद उत्पादक भी है और उपभोक्ता भी। वह जानती है कि किस दाल को पकने में कम समय लगता है या किस अनाज का स्वाद मीठा है। उसका सर्वेक्षण किताबी नहीं, अनुभवी होता है। जब वह उत्पाद बाजार में लाती है, तो वह क्वालिटी कंट्रोल की पहली गारंटी होती है।

किसान संघ महाकोशल की प्रदेश उपाध्यक्ष-सुश्री ज्ञानमंजरी दीक्षित ने बताया कि- आज के युग में उत्पादन का अर्थ केवल वस्तु बनाना नहीं है, बल्कि एक सम्बन्ध बनाना है। यह सम्बन्ध संपर्क से शुरू होकर उपयोग के बाद भी सर्वेक्षण के माध्यम से जीवित रहता है। आज हम जिस समाज में रहते हैं, वहां जब भी किसान शब्द का नाम लिया जाता है, तो आंखों के सामने एक पुरुष का चित्र उभरता है। लेकिन हकीकत यह है कि भारत के खेतों की असली रीढ़ हमारी महिलाएं हैं। सरपंच-श्रीमती शान्ति प्रजापति ने कहा कि- अक्सर खेतों के बाहर लगे बोर्ड पर पुरुष का नाम होता है, लेकिन उस खेत की मिट्टी के भीतर महिला किसान का पसीना होता है।

READ ALSO  घर-घर पहुंचेगी PM सूर्य घर योजना की जानकारी, ‘सेवा सेतु कैंप’ के जरिए होगा जागरूकता अभियान

महिला किसान वर्ष केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उस अदृश्य श्रम को पहचान देने का एक आंदोलन है। खेत की धूल को माथे का तिलक बनाती है, वो महिला किसान ही है जो पत्थर से भी फसल उगाती है। सिर्फ अन्न नहीं उगाती वो, इस देश का भविष्य बनाती है। प्रदेष कार्य समीति सदस्य महिला मोर्चा की श्रीमती पूनम अग्रवाल ने बताया कि-महिला किसान वर्ष मनाना तब सार्थक होगा जब हम उत्पादन से लेकर बाजार के हर सर्वेक्षण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। हमें यह स्वीकार करना होगा कि यदि किसान का हाथ मिट्टी में है, तो महिला किसान का दिल उस मिट्टी की खुशबू में है।
संम्पर्क अभियान में श्रीमती रीना श्रीवास्तव, श्रीमती अनुराधा बक्षी से सम्पर्क किया गया। इसमें उपस्थित महिलाओं की संख्या 67 रही।

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins