छत्तीसगढ़

अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचेगी छत्तीसगढ़ की खुशबू, बासमती धान मिशन को मिली हरी झंडी

By Admin|05 Jun 2026, 3:12 PM
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 रायपुर
प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने के लिए बासमती धान मिशन शुरू किया जाएगा। इसकी शुरुआत कुछ जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में करने की तैयारी है, जिसे बाद में चरणबद्ध तरीके से सभी जिलों में विस्तारित किया जाएगा। कृषि विकास मंत्री रामविचार नेताम की अध्यक्षता में गुरुवार को नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन की बैठक हुई।

किसानों के हित सर्वोपरि- नेताम
बैठक में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। मंत्री नेताम ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं। उनकी आय बढ़ाने के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, सरकार उन्हें प्राथमिकता के साथ लागू करेगी। बैठक में सामान्य धान की खेती में फसल विविधीकरण तथा राज्य में बासमती धान के रकबे को बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

बैठक में राज्य में बासमती धान उत्पादन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को किसानों की आय बढ़ाने के लिए इस योजना पर गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

बैठक के दौरान यह तय किया गया कि छत्तीसगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बासमती धान की खेती शुरू की जाएगी। इसके लिए ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां की जलवायु और तापमान बासमती उत्पादन के अनुकूल हैं। चयनित क्षेत्रों में खेती का रकबा बढ़ाकर किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ दिलाने की योजना तैयार की जाएगी।

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अधिकारियों ने बताया कि बासमती और अन्य सुगंधित चावलों की यूरोप सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी मांग है। सामान्य धान की तुलना में इन किस्मों को बेहतर मूल्य मिलता है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन ने भी इस पहल में सहयोग का भरोसा दिया है। फेडरेशन की ओर से किसानों के लिए बायबैक व्यवस्था, विपणन सहायता और निर्यात के अवसर उपलब्ध कराने की बात कही गई। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार मिल सकेगा।

बैठक में उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात को जोड़ते हुए एक समन्वित व्यवस्था विकसित करने पर भी सहमति बनी। सरकार का मानना है कि यह पहल न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ को सुगंधित चावल उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान भी दिला सकती है। 

 

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