उत्तर प्रदेशराज्‍य

सीएम योगी के नेतृत्व में महिलाओं के जीवन में आ रहा बड़ा बदलाव

By Admin|12 Jul 2026, 9:31 PM
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लखनऊ

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 कभी विकास और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझने वाला सोनभद्र और आसपास का क्षेत्र अब महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण उद्यमिता की नई पहचान बन गया है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार से सटे इस इलाके में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी आदिवासी महिलाएं आज महुआ-श्रीअन्न (मिलेट्स) के जरिए सफल कारोबार कर रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और श्रीअन्न को बढ़ावा देने की नीति ने इस बदलाव को नई गति दी है।

जिन गांवों में कभी विकास की रफ्तार धीमी थी, वहां अब आर्थिक स्थिति हो रही मजबूत

सोनभद्र की मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी ने बताया कि पूर्व में सोनभद्र जिला और आसपास का क्षेत्र लंबे समय तक विकास की अनेक चुनौतियों से जूझता रहा। सीमित रोजगार के अवसर और बुनियादी सुविधाओं की कमी यहां की प्रमुख समस्याएं थीं। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और सरकारी योजनाओं की बेहतर पहुंच ने हालात बदले हैं। आज यही क्षेत्र ग्रामीण उद्यमिता और महिला आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रहा है। जिन गांवों में कभी विकास की रफ्तार धीमी थी, वहां अब महिलाओं के बनाए उत्पाद बाजार तक पहुंच रहे हैं और परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

श्रीअन्न बना जनजातीय महिलाओं की आर्थिक ताकत

योगी सरकार की पहल से श्रीअन्न अब केवल खेती का उत्पाद नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन चुका है। स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग, पैकेजिंग और विपणन की सुविधाएं मिलने से महिलाएं रागी मिलेट लड्डू, अलसी के लड्डू, मिलेट कुकीज, मिलेट बिस्किट, मिलेट नमकीन समेत कई पौष्टिक उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की बढ़ती मांग ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ाए हैं।

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घोरावल की महिलाओं ने बनाई सफलता की नई मिसाल

सोनभद्र के विकास खंड घोरावल स्थित दुर्गा स्वयं सहायता समूह की 15 से अधिक महिलाएं मिलेट्स आधारित खाद्य उत्पाद तैयार कर रही हैं। ये महिलाएं हर महीने लगभग 40 से 50 हजार रुपये के उत्पादों की बिक्री करती हैं। इससे प्रत्येक महिला को सालाना करीब एक लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय हो रही है। यह समूह आज आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन चुका है।

म्योरपुर विकास खंड की महिलाओं ने महुआ और सांवा को बनाया रोजगार का माध्यम

सोनभद्र के आदिवासी बहुल म्योरपुर विकास खंड के लिलासी गांव की सुनीता देवी बताती हैं कि खुशबू आजीविका स्वयं सहायता समूह इस बदलाव का बड़ा उदाहरण है। इसी समूह की सदस्य सुनीता कहती हैं कि उनके समूह की 14 महिलाएं महुआ के लड्डू और सांवा जैसे पारंपरिक एवं पौष्टिक उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की मांग अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रही, बल्कि दूसरे क्षेत्रों से भी ऑर्डर मिलने लगे हैं। इससे महिलाओं की आय लगातार बढ़ रही है और वे आत्मनिर्भर बनने के साथ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं। प्रियंका, संगीता, जिरमन, सोनकुंवर, पुष्मतिया, मलावती, हीरामनी और रीना आदि महिलाएं भी समूह से जुड़ी हैं और बदलते परिदृश्य का उदाहरण बन रही हैं।

ग्रामीण आजीविका मिशन बना महिला सशक्तीकरण का आधार

सोनभद्र की मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को केवल आर्थिक गतिविधियों से नहीं जोड़ा जा रहा, बल्कि उन्हें स्वरोजगार, कौशल विकास और समूह आधारित उद्यम के लिए भी तैयार किया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि जिन जनजातीय क्षेत्रों को कभी विकास की मुख्यधारा से दूर माना जाता था, वहीं की महिलाएं आज अपने उत्पादों के जरिए स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रही हैं।

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