मध्य प्रदेश

शादियों पर ब्रेक! 5 दिसंबर से लग रहा खरमास, फरवरी में फिर बजेगी शहनाई

By Admin|29 Nov 2025, 4:02 PM
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भोपाल 
देव उठनी एकादशी के बाद से शुरू हुए वैवाहिक सीजन में अब इस साल सिर्फ आधा दर्जन मुहूर्त ही शेष बचे हैं। नवंबर और 5 दिसंबर तक शादियों के गिने चुने मुहूर्त में मांगलिक कार्य हो सकेंगे, लेकिन इसके बाद शुक्र गृह अस्त और खरमास की वजह से शादियां अब सीधे फरवरी माह में ही हो सकेंगी। शादियों के कुछ मुहूर्त ही शेष होने से बाजार में खरीदी के लिए लोगों की भीड़ नजर आ रही है। देवउठनी एकादशी के बाद वैवाहिक सीजन विलंब से शुरू होने से इस बार विवाह के कम मुहूर्त ही थे।

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विवाह में 5 दिसंबर से रोक, सीधे फरवरी में होगी शादियां
ज्योतिषाचार्य पं. रामगोविंद शास्त्री के अनुसार नवंबर माह में 29,30 और दिसंबर में 1,4,5 दिसंबर ही विवाह के लिए शुभ मुहूर्त हैं। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की देव उठनी एकादशी के दिन श्रीहरि विष्णु के चार माह की निद्रा से जागने के बाद मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। इस बार 16 नवंबर को सूर्य के तुला राशि से निकलकर गोचर के बाद करने के बाद शुद्ध वैवाहिक मुहूर्त शुरू हुए, लेकिन खरमास और शुक्र गृह के अस्त होने से जनवरी में शादियां नहीं होंगी।इस दौरान भी विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण आदि मांगलिक कार्य पर विराम लगता है। इसके बाद विवाह के मुहूर्त 4 फरवरी के बाद से शुरू होंगे।
 
जनवरी में नहीं होंगी शादियां, साल 2026 में 59 शुभ मुहूर्त
वर्ष 2025 में शादियों के लिए विवाह के कुल 75 मुहूर्त थे। इनमें से 50 मुहूर्त से अधिक मुहूर्त जनवरी से जून के बीच थे। इसके बाद जुलाई से अक्टूबर से चातुर्मास के चलते कोई विवाह मुहूर्त नहीं थे। बात अगर 2026 की करें तो इसमें 59 विवाह का मुहूर्त हैं। इस अनुसार यह वर्ष भी वैवाहिक आयोजन के लिए अनुकूल माना जा रहा है।जनवरी को छोड़ दिया जाए तो फरवरी में 12 दिन शुभ मुहूर्त पर विवाह होंगे। इसके बाद मार्च में नौ, अप्रैल-मई में आठ-आठ, जून में सात और जुलाई में चार दिन विवाह मुहू्र्त रहेंगे। इसके बाद नवंबर में चार और दिसंबर में सात दिन विवाह होंगे।

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14 जनवरी तक रहेगा खरमास
16 दिसंबर को सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं, जिससे खरमास की शुरुआत हो जाएगी। वहीं खरमास का समापन 14 जनवरी 2026 को होने जा रहा है। ऐसे माना जाता है कि इस दौरान किए गए शुभ कार्यों में देवगुरु बृहस्पति और सूर्य देव की कृपा प्राप्त नहीं होती, जिससे उस कार्य से शुभ परिणाम नहीं मिलते। ऐसे में इस दौरान विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश आदि जैसे कार्य करने की मनाही होती है। विवाह के लिए ग्रहों की शुभता आवश्यक माना गया है। शुक्र अस्त होने के कारण भी शादियां नहीं होती हैं।

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