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देश में 5जी क्रांति, बिहार की रफ्तार ने सबको चौंकाया

By Admin|18 May 2026, 9:11 AM
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पटना

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देश में 5जी नेटवर्क सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। खास बात यह है कि जिस बिहार को अक्सर विकास की दौड़ में पीछे बताया जाता है, वह 5जी कवरेज के मामले में देश के टेक हब कर्नाटक और बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से भी आगे है। बिहार में अब 94.52% आबादी 5जी नेटवर्क की पहुंच में आ चुकी है। जबकि राष्ट्रीय औसत 86.18 प्रतिशत है। देश के आईटी हब कर्नाटक में यह कवरेज सिर्फ 79.92% है, जबकि यूपी में 85.25 % लोग 5जी से जुड़ पाए हैं। बेंगलुरु दुनिया की बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों के दफ्तर हैं। फिर भी वहां का ग्रामीण इलाका 5जी की रफ्तार से दूर है।

बिहार में ग्रामीण इलाकों में 5जी सेवाओं पर हुआ काम
बिहार में 5जी सेवाओं की बेहतर कवरेज की सबसे बड़ी वजह यह है कि टेलीकॉम कंपनियों ने बिहार में ग्रामीण इलाकों को प्राथमिकता दी, जबकि कर्नाटक में शहरी क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया गया। बिहार में कंपनियों और सरकार ने मिलकर गांव-गांव तक 5जी नेटवर्क पहुंचाने में कवायद की है।

केन्द्र सरकार के भारत नेट परियोजना के तहत बिहार के लगभग 8,860 ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया है, जिस पर 812 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। योजना का मकसद हर गांव में तेज इंटरनेट पहुंचाना है। बिहार ने इसे सफलतापूर्वक अमल में लाया। इसका नतीजा है कि आज बिहार के दूरदराज के गांवों में बैठे लोग भी अब 5जी इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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दूरसंचार दिवस का क्या है इतिहास
यह दिवस पहली बार 1969 में मनाया गया था, जो 1865 में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) की स्थापना की वर्षगांठ के रूप में चुना गया। इसका उद्देश्य लोगों को दूरसंचार के महत्व, डिजिटल विभाजन को पाटने और नई तकनीकों के बारे में जागरूक करना है। यह दिन सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से दुनिया को जोड़ने और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का संदेश देता है।

राष्ट्रीय राजमार्गों-ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या
बिहार में भले ही 5जी नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है। लेकिन नेटवर्क कनेक्विटी अब भी कई जगहों पर ठीक नहीं है। राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1750 किलोमीटर क्षेत्र में 424 स्थान ऐसे हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क बिल्कुल उपलब्ध नहीं है। इन जगहों पर टावरों के बीच की दूरी इतनी अधिक है कि नेटवर्क पहुंच ही नहीं पाता। दूरसंचार के मानक के अनुसार शहरी टावरों के बीच की दूरी 500 से 800 मीटर के बीच होनी चाहिए। लेकिन कई जगहों पर यह 1.5 से 2 किलोमीटर से भी अधिक है। गांवों में 3 से 5 किलोमीटर, जो 7 से 8 किलोमीटर तक भी है। इससे नेटवर्क की समस्या अब भी कई जगहों पर है।

बीएसएनएल से केवल 36.89% कॉल ही लग पाया
ट्राई ने नेटवर्क की स्थिति जानने के लिए जनवरी में इंडिपेंडेंट ड्राइव टेस्ट कराया। यह टेस्ट समस्तीपुर जिले में किया गया। सबसे बड़ी चिंता बीएसएनएल को लेकर सामने आई। बीएसएनएल से केवल 36.89% कॉल ही लग पाया, जबकि 10.04% कॉल ड्राप हो गई। एयरटेल और जियो ने 99% से अधिक कॉल सफलता दी। डाउनलोड स्पीड में भी बड़ा अंतर सामने आया। जियो ने 158 एमबीपीएस, एयरटेल ने 101 एमबीपीएस, जबकि बीएसएनएल का केवल 12 एमबीपीएस स्पीड रहा। ट्राई की रिपोर्ट के अनुसार सीवान, रोहतास, कैमूर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और सीमावर्ती इलाकों में टावरों के बीच अधिक दूरी है।

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