जागरण संवाददाता, देहरादून। Chardhan Highway Project सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर कमेटी के अध्यक्ष पद से प्रो. रवि चोपड़ा ने इस्तीफा दे दिया है। चार धाम राजमार्ग परियोजना में पर्यावरणीय पहलुओं को लेकर वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इस कमेटी का गठन किया था। अपने इस्तीफे में प्रो. रवि चोपड़ा ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों पर चौड़ीकरण कार्य में सड़कों के मनमर्जी के कटान का भी आरोप लगाया है। साथ ही सड़क चौड़ीकरण में पर्यावरण के विभिन्न पहलुओं पर अपनी चिंता भी जाहिर की है।
प्रो. रवि चोपड़ा की अध्यक्षता वाली 25 सदस्यीय हाई पावर कमेटी ने चार धाम राजमार्ग परियोजना में सड़कों की चौड़ाई 5.5 मीटर तक सीमित रखने की संस्तुति की थी। हालांकि, इस चौड़ाई को लेकर समिति के बीच हमेशा मतभेद की स्थिति रही। दूसरी तरफ सड़कों का चौड़ीकरण भी संस्तुति के इतर पहले ही 10 मीटर के आधार पर किया जाना लगा था। हालांंकि, 14 दिसंबर 2021 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने सामरिक महत्व वाली बदरीनाथ, गंगोत्री व पिथौरागढ़ राजमार्ग में सड़क की चौड़ाई 10 मीटर करने की अनुमति जारी कर दी थी।
इस विवाद का यहीं पटाक्षेप होता दिख रहा था, लेकिन प्रो. रवि चोपड़ा ने सभी को चौंका दिया है। माना जा रहा है कि वह पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने की कवायद से नाखुश हैं। प्रो. चोपड़ा ने ‘जागरण’ से बातचीत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश अपनी जगह ठीक है, लेकिन चौड़ीकरण कार्य में लगी मशीनरी का रवैया कभी भी पर्यावरण संरक्षण के अनुरूप नहीं रहा। उनकी संस्तुतियों व सुझाव पर अधिकारियों ने कभी ध्यान ही नहीं दिया। ऐसे में कमेटी में बना रहना सही नहीं है।
अब बूढ़ा हो चुका हूं और व्यवस्था भी अनुकूल नहीं
प्रो. रवि चोपड़ा ने कहा कि कमेटी के अध्यक्ष रहने के दौरान उन्होंने राजमार्ग मंत्रालय से जब भी कोई आंकड़े मांगे तो उन्हें सहयोग नहीं किया गया। अब सुप्रीम कोर्ट ने सामरिक महत्व वाली सड़कों के चौड़ीकरण की निगरानी के लिए जस्टिस सीकरी कमेटी का गठन किया है। उन्हें सिर्फ 150 किमी सड़कों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजमार्ग मंत्रालय चाहे तो गैर सामरिक महत्व वाली सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने को लेकर उनके समक्ष पक्ष रख सकती है। इसके साथ ही प्रो. चोपड़ा ने कहा कि वह बूढ़े हो चुके हैं। उम्र 75 वर्ष हो चली है और इस अवस्था में अधिक भागदौड़ संभव नहीं।