मध्य प्रदेशराज्‍य

MP में कर्मचारियों की हड़ताल से बिगड़े हालात, टैंकर से पानी की सप्लाई बंद; प्रशासन की बढ़ी चिंता

By Admin|06 Nov 2026, 2:05 PM
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भोपाल
 मध्यप्रदेश में सफाईकर्मियों की हड़ताल से शहरों की सफाई व्यवस्था बिगड़ने लगी है। भोपाल में लगातार दूसरे दिन घरों से कचरा नहीं उठाया गया। शहर में 400 से ज्यादा कचरा गाड़ियां खड़ी हैं। वहीं, अब पेयजल सप्लाई पर भी संकट मंडराने लगा है। जलप्रदाय विभाग के कर्मचारियों ने शुक्रवार से पानी की सप्लाई बंद करने की चेतावनी दी है। इससे राजधानी के लाखों लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। कर्मचारी वेतन 10,500 रुपए से बढ़ाकर 25 हजार रुपए करने, अनुकंपा नियुक्ति और अन्य मांगों को लेकर दो दिन से हड़ताल कर रहे हैं। शुक्रवार से इस आंदोलन के और बढ़ने की संभावना है। भोपाल में सफाईकर्मियों के साथ दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हो गए हैं।

भोपाल में 13 हजार कर्मचारी हड़ताल पर
अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन (7262) के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के अनुसार, भोपाल में करीब 7 हजार सफाईकर्मी हैं। इनके अलावा लगभग 6 हजार अन्य कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हैं। इनमें कंप्यूटर ऑपरेटर, बाबू, जलप्रदाय, फायर, बिल्डिंग परमिशन, अतिक्रमण, विद्युत, यांत्रिकी, उद्यान और योजना प्रकोष्ठ के कर्मचारी शामिल हैं। झांझोट ने बताया कि गुरुवार से शुरू हुई हड़ताल शुक्रवार को भी जारी रहेगी। इसका असर नगर निगम मुख्यालय के साथ शहर के सभी 85 वार्डों और 21 जोन में दिखाई दे रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात नहीं होती, तब तक आंदोलन को लेकर कोई अगला फैसला नहीं लिया जाएगा।

400 से ज्यादा कचरा गाड़ियां खड़ी, घरों से नहीं उठा कचरा
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ा है। भोपाल में घर-घर से कचरा उठाने के लिए 400 से अधिक गाड़ियां लगाई गई हैं, लेकिन कर्मचारियों के काम बंद करने से ये सभी गाड़ियां गार्बेज स्टेशनों पर खड़ी हैं।

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आमतौर पर प्रत्येक गाड़ी दिन में दो से तीन बार चक्कर लगाकर घरों से कचरा इकट्ठा करती है। इसके बाद कचरा शहर के 17 गार्बेज स्टेशनों पर पहुंचाया जाता है। यहां से कैप्सूल टैंकरों के जरिए इसे आदमपुर छावनी स्थित प्लांट भेजा जाता है। भोपाल में हर दिन करीब 850 टन कचरा निकलता है। ऐसे में हड़ताल जारी रहने पर सड़कों और कॉलोनियों में कचरे के ढेर लग सकते हैं। पहले से ही कई इलाकों में डस्टबिन भरने के बाद कचरा बाहर फैलने लगा है।

शुक्रवार से पानी सप्लाई बंद करने की चेतावनी
सफाई व्यवस्था के बाद अब पानी की सप्लाई पर भी असर पड़ने की आशंका है। जलप्रदाय विभाग के कर्मचारियों ने शुक्रवार से पानी की सप्लाई बंद करने की चेतावनी दी है। भोपाल में 2.30 लाख से ज्यादा नल कनेक्शन हैं। ऐसे में अगर पानी की सप्लाई बंद होती है तो बड़ी आबादी को परेशानी हो सकती है। फिलहाल कर्मचारियों की चेतावनी से शहर में जलसंकट की चिंता बढ़ गई है।

2.30 लाख नल कनेक्शन पर जल संकट का खतरा
सफाई व्यवस्था के बाद अब पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। कर्मचारियों ने शुक्रवार से जलप्रदाय का काम भी बंद करने की चेतावनी दी है। भोपाल में 2.30 लाख से ज्यादा नल कनेक्शन हैं। ऐसे में जलप्रदाय कर्मचारियों की हड़ताल में शामिल होने से बड़ी आबादी प्रभावित हो सकती है।

अटल भवन में ताला, बिजली सप्लाई भी बंद की
हड़ताल का असर भोपाल नगर निगम मुख्यालय स्थित अटल भवन में भी दिखाई दिया। गुरुवार को कर्मचारी नेता ने भवन की बिजली सप्लाई बंद कर दी और वहां ताला लगा दिया। इससे निगम मुख्यालय का कामकाज ठप हो गया। यूनियन अध्यक्ष मगनलाल झांझोट ने कहा कि अब आर-पार की लड़ाई होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद ही हड़ताल को लेकर कोई फैसला लिया जाएगा।

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नगर निगम मुख्यालय में भी कामकाज प्रभावित
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने से नगर निगम मुख्यालय स्थित अटल भवन में भी कामकाज प्रभावित हुआ है। गुरुवार को कर्मचारी नेता अशोक वर्मा ने निगम मुख्यालय की बिजली सप्लाई बंद कर दी और भवन पर ताला लगा दिया। इससे नगर निगम के सामान्य कामकाज पर भी असर पड़ा है। कर्मचारियों की मांग है कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए।

शिवपुरी और विदिशा में भी सफाई व्यवस्था ठप
भोपाल के अलावा शिवपुरी और विदिशा समेत प्रदेश के कई शहरों में भी हड़ताल का असर दिखाई दे रहा है। शिवपुरी नगर पालिका के करीब 350 कर्मचारी काम बंद कर आंदोलन में शामिल हैं। इसके कारण यहां भी सड़कों और बाजारों में कचरा जमा होने लगा है।

प्रदेशभर में एक लाख से ज्यादा कर्मचारी नियमितीकरण, वेतन बढ़ाने और ठेका प्रथा खत्म करने जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। अगर सरकार और कर्मचारियों के बीच जल्द बातचीत से कोई रास्ता नहीं निकलता है तो सफाई व्यवस्था के साथ पानी और दूसरी जरूरी नागरिक सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

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