उत्तर प्रदेशराज्‍य

Ganga Expressway: 594KM लंबा एक्सप्रेसवे जो 12 जिलों को जोड़ेगा, पश्चिमी और पूरब यूपी की होगी कनेक्टिविटी

By Admin|25 Apr 2026, 9:06 AM
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नई दिल्ली

Ganga Expressway: उत्तर प्रदेश में सड़क नहीं, रफ्तार का एक नया अध्याय खुलने जा रहा है. 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) का लोकार्पण कर सकते हैं. ये सिर्फ एक प्रोजेक्ट की शुरुआत नहीं होगी, बल्कि 'नए यूपी' की रेस का अगला गियर लगेगा. सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार जिस इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल की बात करती रही है, गंगा एक्सप्रेसवे उसका सबसे बड़ा और सबसे तेज उदाहरण बनकर सामने आने वाला है। 

सबसे ख़ास बात ये है कि, तकरीबन 36,402 करोड़ की लागत से बनकर तैयार होने वाला 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसव अब तक का यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेस वे है. इसके बाद गोरखपुर–शामली ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे पर भी काम चल रहा है जो तकरीबन 700 किमी लंबा होगा. यानी फिलहाल गंगा एक्सप्रेसवे ही सबसे बड़ा है। 

करीब 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुडापुर दांदू गांव तक जाएगा. यह सड़क पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वी हिस्से से जोड़ेगी. इससे लंबी दूरी का सफर पहले से कहीं ज्यादा तेज, सुरक्षित और आरामदायक हो जाएगा. बताया जा रहा है कि, इस एक्सप्रेसवे के जरिए मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा केवल 6-7 घंटों में ही पूरी की जा सकेगी, जिसके लिए अभी तकरीबन 11 घंटे से ज्यादा समय लगता है। 

इस एक्सप्रेसवे से मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, सम्भल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 जिलों को सीधा फायदा मिलेगा. करीब 519 गांव इस परियोजना से जुड़ेंगे. इससे गांव और शहर के बीच की दूरी सिर्फ किलोमीटर में नहीं, बल्कि विकास के रफ्तार में भी घटेगी। 

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AI बेस्ड हाईटेक टोल कलेक्शन 
इस एक्सप्रेस वे पर कुल 14 टोल प्लाजा बनाए जाएंगे. टोल सिस्टम पूरी तरह से मॉडर्न और डिजिटल होगी, ताकि वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत ही न पड़े. इसके अलावा टोल कलेक्शन के लिए सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक पर बेस्ड हाईटेक कैमरे लगाए गए हैं. जो सिर्फ वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर से ही फास्टैग टोल कलेक्ट कर लेंगे। 

इतना ही नहीं इस एक्सप्रेसवे पर  ‘नो-स्टॉप टोल कलेक्शन सिस्टम’ लगाया जा रहा है. यानी वाहन बिना रूके टोल कलेक्ट करवाते हुए आगे बढ़ते रहेंगे. इससे एक्सप्रेस के टोल प्लाजाओं पर लगने वाले ट्रैफिक जाम के झंझट से भी मुक्ति मिलेगी. वाहनों की अधिकत स्पीड लिमिट 120 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी. सड़क के आसपास कटीले तारों से फेंसिंग की जा रही है, ताकि किसी भी तरह से मवेशियों को सड़क पर आने से रोका जाए और दुर्घटना की स्थिति न बने। 

एक्सप्रेसवे पर मिलेंगी ये सुविधाएं
गंगा एक्सप्रेसवे पर कुल 9 फेसिलिटी सेंटर बनाये गए हैं. हर फैसिलिटी सेंटर पर यात्रियों को कई अलग-अलग तरह की सुविधाएं मिलेंगी. जिसमें पेट्रोल पंप, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग पॉइंट, फूड कोर्ट, कैफेटेरिया, ढाबा, मोटेल, डॉरमेट्री, ट्रामा सेंटर, टॉयलेट्स इत्यादि शामिल हैं. इसके अलावा बीच सड़क किसी के वाहन खराब होने की स्थिति को ध्यान में रखकर मोटर व्हीकल सर्विस सेंटर भी मिलेगा. इस फैसिलिटी सेंटर पर वाहनों को खड़ा करने के लिए बड़ी पार्किंग भी उपलब्ध होगी। 

लाइटिंग का भी इंतजाम
आमतौर पर रात में एक्सप्रेसवे से यात्रा करने पर सबसे बड़ी समस्या लाइटिंग को लेकर देखने को मिलती है. चूकिं एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ खेत होते हैं और आबादी काफी दूर होती है ऐसे में सड़क पर पर्याप्त रोशनी की जरूरत होती है. इसके लिए गंगा एक्सप्रेसवे पर रेड कलर के रेडियम लाइट, सड़क के दोनों किनारों पर ब्लिंकर्स, बीच में पड़ने वाले पुलों पर स्ट्रीट लाइट्स और बेरिकेड्स पीली रेडियम लाइट्स का इंतजाम किया गया है. ताकि रात के समय भी लोग सुरक्षित यात्रा कर सकें। 

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किसानों के लिए बड़ा गेमचेंजर
किसानों के लिए यह एक्सप्रेसवे किसी लाइफलाइन से कम नहीं होगा. अब फसलें तेजी से बाजार तक पहुंच सकेंगी. इससे फसलों की गुणवत्ता बनी रहेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिल सकेगी. खासकर जल्दी खराब होने वाले फसलों और उत्पाद के लिए यह बड़ा फायदा साबित होगा. प्रयागराज समेत कई धार्मिक और सांस्कृतिक शहर इस एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेंगे. इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी. स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। 

एक्सप्रेसवे में यूपी का दबदबा
देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क में पहले ही उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 55 प्रतिशत है. गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही यह आंकड़ा करीब 60 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा. यानी एक्सप्रेसवे की रेस में यूपी बाकी राज्यों से काफी आगे निकलता नजर आ रहा है. बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा मतलब है कम लॉजिस्टिक्स लागत. इससे उद्योगों को फायदा मिलेगा और नए निवेश के दरवाजे खुलेंगे. गंगा एक्सप्रेसवे एक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तौर पर विकसित हो सकता है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके पैदा होंगे। 

गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं है. यह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में अहम भूमिका निभा सकता है. पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के बाद अब यह प्रोजेक्ट यूपी को “एक्सप्रेसवे स्टेट” के रूप में और मजबूत बनाएगा. आने वाले समय में यही इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदेश को देश की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में खड़ा करने की बड़ी वजह बन सकता है। 

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