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पटना हाईकोर्ट ने पब्लिशर को दी राहत, स्वामी रामदेव की किताब को लेकर दर्ज केस खारिज

By Admin|04 Nov 2026, 7:41 PM
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 पटना
पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी धार्मिक गुरु या आध्यात्मिक नेता की कथित मानहानि से आहत होने मात्र से उसका अनुयायी मानहानि का आपराधिक मुकदमा दायर करने का कानूनी अधिकार हासिल नहीं कर लेता।

मानहानि का मुकदमा वही व्यक्ति कर सकता है, जो कानून के तहत उस अपराध से पीड़ित हो। न्यायाधीश आलोक कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने स्वामी रामदेव की जीवनी ‘गॉडमैन टू टाइकून : द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ स्वामी रामदेव’ के प्रकाशक जैगरनॉट बुक्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे को रद करते हुए यह फैसला सुनाया।

अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति के अनुयायी या शिष्य होने के आधार पर उसे अपने गुरु की कथित मानहानि के लिए अभियोजन चलाने का अधिकार नहीं मिल जाता।

इसके लिए यह आवश्यक है कि शिकायतकर्ता स्वयं कथित मानहानिकारक टिप्पणी से प्रभावित हुआ हो। मामले के अनुसार, वैशाली के अमित कुमार ने खुद को स्वामी रामदेव का अनुयायी बताते हुए वर्ष 2017 में शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पुस्तक में स्वामी रामदेव के जीवन और गतिविधियों को इस तरह प्रस्तुत किया गया है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।

पुस्तक में उन्हें तीन आध्यात्मिक व्यक्तियों की मृत्यु के लिए अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार ठहराने और उनके पहनावे को लेकर भी आपत्ति जताई गई थी।

धार्मिक भावनाएं आहत होने के आरोप
शिकायतकर्ता का कहना था कि पुस्तक से उनके और स्वामी रामदेव के अन्य अनुयायियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
हाजीपुर स्थित ट्रायल अदालत ने प्रकाशक के खिलाफ आईपीसी की धारा 295-ए, 500, 501 और 502 के तहत संज्ञान लेते हुए समन जारी किया था।

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हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 199(1) के तहत मानहानि के मामले में संज्ञान लेने के लिए पीड़ित व्यक्ति की शिकायत आवश्यक है।

वहीं, धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से आहत करने के अपराध में राज्य सरकार अथवा केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी जरूरी है।

इस मामले में ऐसी मंजूरी नहीं ली गई थी। साथ ही, शिकायत में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया था कि पुस्तक में किस धार्मिक विश्वास का जानबूझकर अपमान किया गया है।

अदालत ने माना कि अभियोजन आवश्यक कानूनी शर्तों को पूरा नहीं करता है। इसके बाद 7 और 9 अक्टूबर 2017 के संज्ञान आदेशों तथा उनसे जुड़ी सभी आपराधिक कार्यवाहियों को रद कर दिया।

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