छत्तीसगढ़

XUV700 ड्राइवर पर हेलमेट न पहनने का जुर्माना, जानिए क्या है पूरा मामला

By Admin|29 Apr 2026, 5:11 PM
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डोंगरगढ़.

ट्रैफिक नियमों के पालन के लिए लागू किया गया ई-चालान सिस्टम अब खुद अपनी विश्वसनीयता खोता नजर आ रहा है. ताजा मामला उस गंभीर तकनीकी खामी को उजागर करता है. एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर CG 04 QM 9295 दो अलग-अलग वाहन, जिनमें एक टू-व्हीलर और एक SUV कार पर दर्ज पाया गया.

इस गड़बड़ी का खामियाजा भुगतना पड़ा राजनांदगांव निवासी पीड़ित अमित गौतम को, जिनकी कार पर बिना हेलमेट के वाहन चलाने का चालान जारी कर दिया गया. अमित गौतम के पास XUV 700 कार है, लेकिन उनके मोबाइल पर जो ई-चालान पहुंचा, वह एक ऐसे उल्लंघन का था जो केवल दोपहिया वाहन से संबंधित होता है. पहले तो वे इस नोटिस को देखकर हैरान रह गए, लेकिन जब उन्होंने मामले की गहराई से जांच की, तब पूरा खेल सामने आया. पता चला कि इसी नंबर से एक बाइक भी सड़कों पर चल रही है, जो नियमों की अनदेखी कर रही है, जबकि चालान SUV मालिक के नाम पर फट रहा है.
यह घटना RTO के डेटा मैनेजमेंट सिस्टम में गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करती है. वाहन पंजीयन जैसे संवेदनशील रिकॉर्ड में एक ही नंबर का दो बार दर्ज होना न सिर्फ तकनीकी चूक है, बल्कि यह सिस्टम की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है. इसके साथ ही नंबर प्लेट पहचान (ANPR) तकनीक और ई-चालान जनरेशन प्रक्रिया की सटीकता भी संदेह के घेरे में आ गई है.

पीड़ित अमित गौतम ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बिना किसी गलती के उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा. उनका कहना है कि यदि वे समय रहते सच्चाई तक नहीं पहुंचते, तो उन्हें बेवजह जुर्माना भरना पड़ता. उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि “सिस्टम सुधारने की बजाय अगर ऐसे ही फर्जी चालान भेजे जाएंगे, तो आम आदमी आखिर जाए तो जाए कहां?” अमित गौतम अब इस मामले की शिकायत RTO के वरिष्ठ अधिकारियों से करने जा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यदि विभाग इस गलती को स्वीकार कर सुधार और माफी नहीं देता, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे.

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यह पूरा मामला एक बड़े खतरे की ओर इशारा करता है, तकनीक पर आंख बंद कर भरोसा करना. जब सिस्टम में ही खामियां हों और उनकी समय पर जांच न हो, तो उसका सीधा असर आम नागरिक पर पड़ता है. जरूरत इस बात की है कि RTO अपने डेटा सिस्टम की व्यापक जांच करे, दोहराव और त्रुटियों को तुरंत दुरुस्त करे, और ई-चालान जैसी व्यवस्थाओं को पारदर्शी व भरोसेमंद बनाए, ताकि ‘स्मार्ट सिस्टम’ वाकई स्मार्ट साबित हो, न कि आम लोगों के लिए मुसीबत.

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