मध्य प्रदेश

महापौर और पार्षद पद के उम्मीदवारों के लिए बड़ा बदलाव, आपराधिक मामलों की पूरी रिपोर्ट देनी होगी शपथ पत्र में

By Admin|22 Nov 2025, 3:05 PM
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भोपाल 

महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष के साथ पार्षद पद का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अब अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण की पूरी जानकारी शपथ पत्र में देनी होगी। इतना ही नहीं, लोकसभा व विधानसभा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की तरह प्रतिदिन का चुनावी खर्च का ब्यौरा देना होगा। 

राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी बदलाव का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। उम्मीदवारों के चुनाव खर्च की लिमिट नगरीय विकास एवं आवास विभाग के परामर्श से तय की जाएगी। प्रदेश के नगर निकायों में महापौर, नगर पालिका एवं नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षद पद के चुनाव पांच साल में होते हैं।

कुछ नगरपालिका और नगर परिषदों को छोड़ 90 फीसदी निकायों में यह चुनाव वर्ष 2027 में होंगे। इसके पहले 2022 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निकायों में चुनाव कराए गए थे। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव दीपक सिंह ने आदेश जारी किया है। जिसके तहत पार्षद पद के उपचुनाव भी नई व्यवस्था से होंगे।

कितने केस दर्ज, चल-अचल संपत्ति कितना बताना होगा

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि चुनाव लड़ने वाले महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष, पार्षद पद के उम्मीदवार को अपनी खुद, पत्नी या पति और तीन बच्चों की आमदनी और चुकाए जाने वाले टैक्स की जानकारी भी देना होगी। यह भी बताना होगा कि उसकी आय का साधन क्या है?

लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार जिस तरह से सोशल मीडिया अकाउंट, ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर की डिटेल देते हैं, उसी तरह इन्हें भी जानकारी देना होगा। राज्य निर्वाचन आयोग को बताना होगा कि दो साल या अधिक समय की सजा वाले कितने आपराधिक मामले उन पर दर्ज हैं। इसकी थाने में दर्ज एफआईआर, थाना और जिला का ब्यौरा बताने के साथ न्यायालय में चल रहे केस और अन्य ब्यौरे देने होंगे।

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इसके साथ ही संयुक्त स्वामित्व वाली चल और अचल संपत्ति की जानकारी भी शपथ पत्र में देना तय किया गया है। साथ ही उम्मीदवार द्वारा शेयर और कंपनियों में किए गए निवेश का ब्यौरा भी देना होगा। साथ ही कितना कर्ज लिया और दिया गया है तथा किन सरकारी एजेंसियों का कितना बकायादार उम्मीदवार है, इसकी जानकारी देने का प्रावधान भी इसमें किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी साफ किया है कि उम्मीदवार अपने घर पर लगे फ्लश शौचालय और जलवाहित शौचालय की भी लिखित जानकारी देंगे।

चुनाव में कितना खर्च होगा, इसकी लिमिट होगी तय

आयोग ने कहा है कि चुनाव में किस तरह से धन बल का उपयोग किया जाता है, राज्य निर्वाचन आयोग इससे वाकिफ है। इसलिए नगरीय विकास और आवास विभाग द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग के साथ चर्चा कर चुनाव में होने वाले खर्च की अधिकतम सीमा भी तय की जाएगी।

आयोग के उम्मीदवारों द्वारा जो खर्च किया जाएगा और उसका भुगतान किया जाएगा उसकी पूरी डिटेल दी जाएगी। इसके साथ ही चुनाव खर्च का एक अलग रजिस्टर बनाया जाएगा। चुनाव खर्च की जानकारी तीस दिन के भीतर देना भी अनिवार्य किया गया है। इसमें यह व्यवस्था भी की गई है कि प्रत्याशी के चुनावी खर्च की जानकारी कोई भी व्यक्ति दस रुपए की फीस जमा करके ले सकेगा।

 

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