राजनांदगांव : कार्यों की मॉनिटरिंग कमजोर, सुरक्षा को लेकर प्रयास भी नहीं, हादसे में युवक घायल…

मोहला संभाग में लंबे समय से पदस्थ चार सब इंजीनियरों को हटा दिया गया है। राज्य शासन ने इनका तबादला दूसरे जिलों में किया है। लंबे समय से इस क्षेत्र में इनकी पदस्थापना थी। नेशनल हाईवे-930 के निर्माण के दौरान इन्हीं की मॉनिटरिंग में काम किया गया था। घटिया निर्माण को लेकर हुई शिकायतों के बाद विभाग के सब इंजीनियरों को जवाब तलब भी किया गया है। ट्रांसफर होने वाले मोहला संभाग में पदस्थ सब इंजीनियर ओम प्रकाश खिलाड़ी को कवर्धा उत्तम कुमार सिंह को कवर्धा, अश्विनी यदु को दुर्ग और सत्यम कुमार ध्रुव को कांकेर में पदस्थ किया गया है।
नेशनल हाईवे के निर्माण में लापरवाही बरती गई। इसी वजह से कई जगह अब तक यह अधूरी है। जगह-जगह गड्ढे खोदे गए हैं और परत उखड़ गई है। कई बार इस सड़क में गंभीर हादसे हो चुके हैं। ठेकेदार को फिलहाल 15 दिन की मोहलत देकर जवाब तलब किया गया है। ठेकेदार कन्हैयालाल अग्रवाल को ही चौड़ीकरण का ठेका भी दिया गया है। जिसके निर्माण में हाल ही में भाजपा नेता भरत वर्मा ने की थी। इसके बाद जांच टीम ने निर्माण का जायजा लिया और रिपोर्ट राज्य शासन को भेजी है।
रविवार शाम करीब 7.30 बजे भी अंबागढ़ चौकी के बिहरी कला के पास एक युवक बाइक सहित गड्ढे में गिरकर घायल हो गया। ऐसे हादसे लगातार हो रहे हैं। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत भी प्रशासन से की है। लेकिन इसके बाद भी सुरक्षा को लेकर कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। गड्ढे खोदकर बगैर संकेतक लगाए के छोड़ दिए गए हैं। लोनिवि की कमजोर मॉनिटरिंग बड़ी वजह सड़क निर्माण में लापरवाही और सुरक्षा की अनदेखी की कई शिकायत पहले भी हो चुकी है। लेकिन लोक निर्माण विभाग के अफसर लगातार अनदेखी कर रहे हैं। कार्यों की मॉनिटरिंग कमजोर है। जिसकी वजह से ठेकेदार की मनमानी जारी है। अफसरों की अनदेखी का खामियाजा क्षेत्र के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
राजनांदगांव-मोहला मानपुर सड़क के 290 करोड़ रुपए के निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार और गुणवत्ता में कमी के आरोपों की ईओडब्ल्यू से जांच कराने की मांग की गई है। शहर कांग्रेस के पूर्व महामंत्री हेमंत ओस्तवाल ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और पीडब्ल्यूडी सचिव को पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई की मांग की है। पूर्व में की गई शिकायत पर 3 अक्टूबर को पीडब्ल्यूडी के चार अधिकारियों की जांच समिति बनाई गई थी, जिसे तीन दिन में रिपोर्ट देनी थी, लेकिन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। 22 अक्टूबर को पीडब्ल्यूडी सचिव मुकेश बंसल ने सड़क का निरीक्षण कर मोटाई, चौड़ाई और लेवल सहित तकनीकी बिंदुओं की जांच रिपोर्ट मांगी थी। ओस्तवाल ने पूरे मामले को ईओडब्ल्यू को सौंपकर कथित भ्रष्टाचार में दोषी पाए जाने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।




