राजनांदगांव : समयप्रभ बोले—संयुक्त परिवार में एक-दूसरे के प्रति समर्पण और सहयोग की थी परंपरा…

राजनांदगांव , ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में मंगलवार को खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर के शिष्य मुनि समयप्रभ सागर ने कहा कि पहले संयुक्त परिवार होता था और लोग एक-दूसरे का दर्द समझते थे किंतु अब एकल परिवार का महत्व बढ़ गया है, लोग अपने ही परिवार में व्यस्त हैं। पहले एक-दूसरे को समझने में सालों लग जाते थे और मां-बाप का भय भी होता था। पहले मां-बाप का एक अलग सम्मान होता था किंतु अब युवा अपना फैसला स्वयं लेते हैं।
संयुक्त परिवार में परिवार पर ही सारी जिम्मेदारी होती थी। लोग एक-दूसरे से खुशियां बांटते थे और एक-दूसरे के प्रति समर्पित रहते थे। एकल परिवार में यह स्थिति नहीं है। अब केवल लोग अपने ही परिवार को अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। कहा कि संयुक्त परिवार में लोगों के पास निजी बातों के लिए समय नहीं होता था किंतु अब एकल परिवार में समय ही समय है।
पहले नैतिकता ज्यादा थी, अब अनैतिकता ज्यादा बढ़ गई है। वर्तमान में हमारे मन में एक धारणा घर कर गई है कि वेस्टर्न कल्चर बहुत अच्छा है। वेस्टर्न कल्चर के चक्कर में हम अपनी ही संस्कृति को भूल रहे हैं। यदि संस्कृति ही नहीं रही तो हमारा अस्तित्व क्या रहेगा? हमें अपनी संस्कृति का मान करना चाहिए। अपने फैसले पर हमें अटल रहना चाहिए और जो करना है उसे संजोकर, समायोजित करें। आप सही दिशा में आगे बढ़ें।




