छत्तीसगढ़राजनांदगांव जिला

राजनांदगांव : पिछले साल 100-120 रुपए थी कीमत इस बार…

By kadwaghut|10 Sep 2026, 10:42 AM
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छुईखदान , छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और ग्रामीण परंपरा से जुड़े तीजा-पोला पर्व को लेकर छुईखदान नगर सहित आसपास के गांवों में तैयारियां जोर पकड़ने लगी है। घरों में साफ-सफाई और पूजा-पाठ की तैयारियां चल रही हैं, वहीं नगर के बाजारों में भी पोला पर्व की रौनक दिखाई देने लगी है। मिट्टी से बने पोरा-जांता, बैल, छोटी बैलगाड़ियां और पारंपरिक खिलौने बाजार में नजर आने लगे हैं। पोला पर्व पर ग्रामीण अंचलों में मिट्टी से बने बैल, जांता और छोटी बैलगाड़ियों की पूजा करने की वर्षों पुरानी परंपरा रही है।

इसी परंपरा को कायम रखने के लिए छुईखदान क्षेत्र के कुंभकार परिवारों ने कई दिन पहले से मिट्टी की पारंपरिक वस्तुएं तैयार करना शुरू कर दिया था। पर्व नजदीक आते ही इनकी मांग भी बढ़ने लगी है। बढ़ती महंगाई के बीच पारंपरिक मिट्टी के सामान बनाने वाले कुंभकारों के सामने कारोबार चलाने की चुनौती भी बढ़ती जा रही है।

कुंभकारों का कहना है कि मिट्टी, रंग, ईंधन और अन्य आवश्यक सामग्री की लागत बढ़ने से पहले की अपेक्षा सामान तैयार करने में अधिक खर्च हो रहा है। इसके बावजूद ग्राहकों की जेब का ध्यान रखते हुए कीमत बढ़ाना आसान नहीं है।

विक्रेताओं के मुताबिक पिछले वर्ष पोरा-जांता की कीमत करीब 100-120 रुपए थी और इस वर्ष महंगाई की मार से लगभग 150 रुपए में ही बिक्री की जा रही है। वहीं छोटी मिट्टी की बैलगाड़ियों की कीमत उनके आकार और सजावट के आधार पर अलग-अलग रखी गई है।

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