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CG : दशकों बाद ग्रामीणों तक पहुंचा नेटवर्क, सुकमा के सुदूर वनांचल टेटरई में लगा बीएसएनएल टावर…

By kadwaghut|01 Sep 2026, 1:26 PM
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2 हजार से अधिक ग्रामीणों की जिंदगी हुई आसान

सुकमा, । दशकों तक भौगोलिक विषमताओं और संचार सुविधाओं के अभाव से जूझते सुकमा के सुदूर वनांचल अब विकास की नई सुबह देख रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन और संवेदनशील नेतृत्व में बस्तर के अंतिम छोर तक डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाने का संकल्प अब धरातल पर उतर आया है। जिला प्रशासन की सक्रियता और निरंतर निगरानी के चलते जिला मुख्यालय से करीब 190 किलोमीटर दूर कोंटा विकासखंड के टेटरई जैसे अति-संवेदनशील व अंदरूनी गांवों में नया मोबाइल टॉवर स्थापित कर नेटवर्क बहाल कर दिया गया है। वर्षों से एक अदद सिग्नल के लिए तरसते इन बीहड़ों में पहली बार बजी मोबाइल की घंटी ने ग्रामीणों के जीवन में विकास और भरोसे का नया संचार किया है।

इस नई कनेक्टिविटी ने स्थानीय ग्रामीणों, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों की जिंदगी को एक नई दिशा दी है। कभी अपनों की कुशलक्षेम पूछने या एक जरूरी कॉल करने के लिए मीलों पैदल चलने को मजबूर ग्रामीण अब अपने घर-आंगन से ही देश-दुनिया से सीधे जुड़ रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राएं अब गांव में रहकर ही ऑनलाइन कक्षाओं, ई-लाइब्रेरी और डिजिटल अध्ययन सामग्री का पूरा लाभ उठा पा रहे हैं। इसके साथ ही स्थानीय वनोपज, लोककला और हस्तशिल्प से जुड़े ग्रामीणों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े बाजारों तक सीधी पहुंच और स्वरोजगार के नए रास्ते खुल गए हैं।

नेटवर्क की उपलब्धता ने प्रशासनिक तंत्र और जनकल्याणकारी योजनाओं को सीधे ग्रामीणों की चौखट तक ला खड़ा किया है। अब डिजिटल बैंकिंग, ईकेवाईसी और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी सुविधाएं बिना किसी बाधा के मिल रही हैं, जिससे ग्रामीणों को अपने हक की राशि के लिए भटकना नहीं पड़ता। सबसे बड़ा बदलाव आपातकालीन सेवाओं में आया हैकृबीमारी या किसी संकट के समय अब ग्रामीण सीधे स्वास्थ्य सेवाओं, एंबुलेंस और प्रशासन से तत्काल संपर्क साध पा रहे हैं, जिससे दूरस्थ अंचलों में सुरक्षा का एक मजबूत कवच तैयार हुआ है।

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कलेक्टर अमित कुमार के अनुसार, बीएसएनएल की ‘4जी सैचुरेशन परियोजना’ के तहत जिले के दुर्गम क्षेत्रों को निर्बाध कॉलिंग और इंटरनेट कनेक्टिविटी से लैस किया जा रहा है। जनहित के संकल्प के साथ घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच भी विकास की रोशनी पहुंचाई जा रही है। सुकमा के इन वनांचलों में गूंजती मोबाइल की यह घंटी केवल संचार का साधन नहीं, बल्कि बस्तर के सुरक्षित, सशक्त और विकसित भविष्य की बुलंद आवाज बन चुकी है।

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