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खनिज परिवहन पर बढ़ी निगरानी, बिहार में बाहरी राज्यों से आने वाली बालू-गिट्टी के लिए नया नियम लागू

By Admin|06 Jun 2026, 8:31 PM
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भागलपुर.

बिहार सरकार ने दूसरे राज्यों से आने वाले बालू, गिट्टी, पत्थर, मोरंग एवं अन्य लघु खनिजों के परिवहन पर निगरानी कड़ी करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्य की सीमा में प्रवेश करने वाले सभी लघु खनिज लदे वाहनों के लिए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) अनिवार्य कर दिया है।

नई व्यवस्था के तहत 10 जून से ट्रांजिट पास जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि 20 जून से इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। जिला खनिज पदाधिकारी बलवंत कुमार के अनुसार अब झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों से बिहार आने वाले खनिज वाहनों को आनलाइन पंजीकरण कराकर ट्रांजिट पास प्राप्त करना होगा। जिला खनन विकास पदाधिकारी ने बताया कि अवैध खनन, फर्जी चालान और अनियमित खनिज परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत वाहन मालिक, ट्रांसपोर्टर और खनिज कारोबारी आईएसटीपी बिहार पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करा सकेंगे। पंजीकरण के बाद प्राप्त लागिन आईडी और पासवर्ड के माध्यम से ट्रांजिट पास के लिए आवेदन किया जाएगा। विभाग ने समय रहते सभी संबंधित लोगों से प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है। विभाग द्वारा ट्रांजिट पास शुल्क भी निर्धारित कर दिया गया है। यदि खनिज की मात्रा वजन के आधार पर दर्ज है तो 60 रुपये प्रति मीट्रिक टन शुल्क देना होगा। वहीं आयतन के आधार पर दर्ज खनिज के लिए 85 रुपये प्रति घनमीटर की दर से शुल्क लिया जाएगा। भुगतान केवल आनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा। नए नियम के अनुसार खनिज स्रोत स्थल से परिवहन चालान जारी होने के छह घंटे के भीतर वाहन पर लदे खनिज के अनुरूप ट्रांजिट पास लेना अनिवार्य होगा। इसकी वैधता परिवहन चालान की अवधि के बराबर होगी। परिवहन के दौरान वाहन चालक के पास संबंधित राज्य का वैध चालान और आईएसटीपी दोनों दस्तावेज होना आवश्यक होगा।

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विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान दोनों में से कोई भी दस्तावेज नहीं मिलने पर बिहार खनिज (समाहरण, अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) नियमावली-2019 तथा संशोधित नियमावली-2026 के तहत जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह जुर्माना दस लाख तक हो सकती है। खान एवं भूतत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिहार में सड़क, पुल और अन्य आधारभूत संरचनाओं के निर्माण कार्यों के कारण खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है। बड़ी मात्रा में बालू, गिट्टी और पत्थर दूसरे राज्यों से मंगाए जा रहे हैं। अब तक इनके परिवहन की कोई प्रभावी निगरानी व्यवस्था नहीं थी, जिससे वास्तविक आंकड़े जुटाने में कठिनाई होती थी। नई आनलाइन प्रणाली लागू होने के बाद राज्य में आने वाले प्रत्येक खनिज वाहन का डिजिटल रिकार्ड तैयार होगा। इससे एक ही चालान पर बार-बार ढुलाई, अवैध परिवहन और राजस्व चोरी जैसी अनियमितताओं पर रोक लगेगी।

सरकार को आयातित खनिजों का सटीक डाटा उपलब्ध होगा, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि राजस्व संग्रह में भी वृद्धि होगी। बिहार सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था खनन क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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