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CG : टाइड ग्रांट से बिजली बिल भुगतान पर सवाल, 32.99 करोड़ के खर्च का मांगा हिसाब …

By kadwaghut|07 Oct 2026, 3:27 PM
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रायपुर । नगरीय निकायों में 15वें वित्त आयोग के टाइड ग्रांट के इस्तेमाल को लेकर बड़ा सवाल सामने आया है। शहरों में पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था सुधारने के लिए मिले इस फंड से प्रदेश के नगरीय निकायों ने 32.99 करोड़ रुपये के बिजली बिलों का भुगतान किया। महालेखाकार (AG) ऑडिट ने इस खर्च को निर्धारित प्रावधानों के विपरीत मानते हुए आपत्ति दर्ज की है।

ऑडिट आपत्ति के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा और बस्तर संभाग के सभी नगरीय निकायों से भुगतान से संबंधित पूरा रिकॉर्ड और मूल नस्तियां तलब की हैं।

32.99 करोड़ के भुगतान का मांगा पूरा हिसाब
संचालनालय के संचालक नीलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने संयुक्त संचालकों को बिंदुवार जानकारी जुटाकर महालेखाकार को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग यह जानकारी जुटा रहा है कि किस निकाय ने कितनी राशि टाइड ग्रांट से बिजली बिलों के भुगतान में खर्च की और इसके लिए किस स्तर पर मंजूरी दी गई।

विभाग ने केवल भुगतान का विवरण ही नहीं, बल्कि मूल नस्तियां, स्वीकृति आदेश और संबंधित दस्तावेज भी मांगे हैं।

आखिर टाइड ग्रांट से बिजली बिल क्यों चुकाए?
केंद्र के 2 जुलाई 2024 के दिशा-निर्देश और राज्य सरकार के 10 जनवरी 2025 के आदेश के मुताबिक टाइड ग्रांट की अधिकतम 10 प्रतिशत राशि ही पाइपलाइन, कचरा प्लांट जैसी सेवाओं के संचालन एवं संधारण यानी O&M पर खर्च की जा सकती है। वह भी सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति और असाधारण परिस्थितियों में।

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ऑडिट का सवाल यही है कि बिजली बिलों के भुगतान को किस आधार पर टाइड ग्रांट के खर्च में शामिल किया गया और क्या इसके लिए निर्धारित अनुमति ली गई थी।

बिजली और स्थापना खर्च निकायों की अपनी आय से
निर्देशों के मुताबिक निकायों को बिजली बिल और स्थापना से जुड़े नियमित खर्च अपने टैक्स, यूजर चार्ज और अन्य स्थानीय आय से वहन करने होते हैं। ऐसे में अब जांच का मुख्य बिंदु यह है कि 32.99 करोड़ रुपये के भुगतान को टाइड ग्रांट से करने की मंजूरी किस आधार पर दी गई।

साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या संबंधित निकायों के पास अपनी आय के पर्याप्त स्रोत होने के बावजूद अनुदान की राशि से बिजली बिलों का भुगतान किया गया।

कार्यपालन अभियंता स्तर से मंजूरी पर भी सवाल
महालेखाकार की आपत्ति में बिजली बिलों के भुगतान के लिए कार्यपालन अभियंता स्तर से राशि मंजूर किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया गया है। अब विभाग यह जांच कर रहा है कि किस निकाय को कितनी राशि मिली, किस बिजली बिल के भुगतान में उसका इस्तेमाल हुआ और भुगतान की स्वीकृति देते समय निर्धारित नियमों का पालन किया गया या नहीं।

ऑडिट ने पूछे 12 अहम सवाल
जांच के लिए विभाग ने विभिन्न बिंदुओं पर दस्तावेज और जानकारी मांगी है। इनमें प्रमुख रूप से—

केंद्रीय गाइडलाइन: 2 जुलाई 2024 के वित्त मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन की प्रति।
लिखित मंजूरी: खर्च से पहले सक्षम अधिकारी की लिखित स्वीकृति ली गई थी या नहीं।
असाधारण स्थिति: बिजली बिल भुगतान को असाधारण परिस्थिति मानने का आधार क्या था।
पांच साल का खर्च: 2021-22 से 2025-26 तक जल और स्वच्छता व्यवस्था पर O&M खर्च का विवरण।
अनुमति देने वाला अधिकारी: 10 प्रतिशत तक O&M खर्च की अनुमति किस अधिकारी ने दी।
टैक्स वसूली: मंजूरी से पहले निकाय की टैक्स वसूली की स्थिति की समीक्षा हुई थी या नहीं।
अनुदान से भुगतान: अपनी आय के बावजूद बिजली बिल टाइड ग्रांट से क्यों चुकाए गए।
विभाग की राय: 32.99 करोड़ रुपये के भुगतान पर AG ऑडिट की आपत्ति के संबंध में विभाग का मत।
मूल नस्तियां: बिजली बिल भुगतान से संबंधित सभी मूल दस्तावेज।
अपनी आय का ब्योरा: टैक्स, यूजर चार्ज, जलकर, किराया, भवन अनुज्ञा, लाइसेंस-पंजीयन समेत अन्य आय की वर्षवार जानकारी।
आर्थिक मजबूरी: बिजली बिल चुकाने में आर्थिक असमर्थता थी तो क्या इसका प्रमाण-पत्र दिया गया।
पांच साल का तुलनात्मक हिसाब: टाइड ग्रांट, O&M प्रावधान और वास्तविक खर्च का तुलनात्मक चार्ट।

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अब दस्तावेजों से साफ होगी भुगतान की पूरी तस्वीर
महालेखाकार की आपत्ति के बाद विभाग द्वारा मूल नस्तियां और स्वीकृति संबंधी दस्तावेज मंगाए जाने से अब यह स्पष्ट होगा कि 32.99 करोड़ रुपये के बिजली भुगतान के लिए किन परिस्थितियों में मंजूरी दी गई और क्या निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ। विभाग की जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही जिम्मेदारी और नियमों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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