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CG : वर्षों बाद खेल मैदान में लौटीं महिलाएं, बस्तर ओलंपिक बना जड़ों से जोड़ने का माध्यम

By kadwaghut|05 Dec 2025, 11:38 AM
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विवाह और जिम्मेदारियों के बाद फिर मिला खेल का अवसर

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हम पूरी मेहनत करेंगे और यकीन है कि हमें मिलेगी जीत– सरोज पोडियाम

रायपुर,

वर्षों बाद खेल मैदान में लौटीं महिलाएं, बस्तर ओलंपिक बना जड़ों से जोड़ने का माध्यम
वर्षों बाद खेल मैदान में लौटीं महिलाएं, बस्तर ओलंपिक बना जड़ों से जोड़ने का माध्यम
वर्षों बाद खेल मैदान में लौटीं महिलाएं, बस्तर ओलंपिक बना जड़ों से जोड़ने का माध्यम

बस्तर ओलम्पिक 2025  का आयोजन इस वर्ष कई महिलाओं को अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ने का अवसर मिला है, ऐसी ही महिलाओं में शामिल हैं सरोज पोडियाम, जो विवाह और पारीवारिक जिम्मेदारियों के चलते वर्षों से खेल से दूर थीं। तीन वर्ष की बच्ची की मां होने के बावजूद उन्होंने खेल मैदान में वापसी कर सभी को प्रेरित किया।

रस्साकसी में संभाग स्तर का मिला टिकट, महिलाओं ने दिखाया जोरदार प्रदर्शन

        सरोज पोडियाम कोंटा विकासखंड के दूरस्थ मुरलीगुड़ा ग्राम की निवासी हैं। वह बताती हैं कि बस्तर ओलम्पिक शुरू होने से उन्हें स्कूल के दिनों की खो-खो और कबड्डी जैसे खेलों की यादें ताजा हो गईं। सरोज बताती हैं हम महिलाओं का अधिकतर समय परिवार, बच्चे और गृहकार्य में बीत जाता है। लेकिन बस्तर ओलम्पिक ने हमें फिर से अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका दिया। इस बार संभाग स्तर तक पहुंचना हम सभी के लिए बड़ी खुशी की बात है।

      बस्तर ओलम्पिक में सरोज पोडियाम और उनकी टीम ने रस्साकसी में दमदार प्रदर्शन करते हुए संभाग स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयन हासिल किया है। टीम की इस उपलब्धि से पूरे परिवार और गांव में खुशी का माहौल है। सरोज कहती हैं कि हम सभी महिला साथी बहुत खुश हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी का धन्यवाद, जिन्होंने हमें अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया। इस बार पूरा प्रयास रहेगा कि हम संभाग में अपने जिले को जीत दिलाएं। बस्तर ओलम्पिक ने हमें दोबारा खेलने का मौका दिया और आस-पास की सभी महिला साथी भी शामिल हुईं।

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माओवादी हिंसा से प्रभावित परिवार, संघर्ष से उपलब्धि तक की यात्रा

     सरोज पोडियाम का परिवार माओवादी हिंसा से प्रभावित रहा है। वर्ष 2009 में नक्सलियों द्वारा उनके ससुर की हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद परिवार गहरे संकट में आ गया। घटना के बाद शासन ने नवा बिहान योजना के तहत सुकमा में उन्हें आवास उपलब्ध कराया तथा उनके पति राकेश को नगर सैनिक के रूप में पदस्थ कर परिवार को संबल दिया। आज वही परिवार संघर्ष की राह से निकलकर बस्तर ओलम्पिक में उपलब्धि की नई कहानी लिख रही है।

टीम का दम, महिलाओं की एकजुटता बनी ताकत

      सरोज पोडियाम ने बताया कि उनकी टीम में नंदिता सोढ़ी, सरिता पोडियामी, लिपिका डे, मुन्नी नाग, ललिता यादव, पुनम भेखर, जसवंती वेट्टी, बण्डी बारसे शामिल हैं। सब महिलाओं ने मिलकर बेहतरीन तालमेल से प्रदर्शन किया और संभाग स्तर तक पहुंचने का गौरव पाया।

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