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पंचायत चुनावों से पहले राजस्थान में OBC राजनीतिक प्रतिनिधित्व का बड़ा सर्वे शुरू

By Admin|10 Jul 2026, 6:32 PM
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जयपुर
राजस्थान में पिछले काफी समय से टल रहे पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर एक बहुत महत्वपूर्ण अपडेट सामने आई है। राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग द्वारा प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सटीक और वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए आज शुक्रवार, 10 जुलाई से एक राज्यव्यापी डिजिटल सर्वेक्षण की शुरुआत कर दी गई है। यह सर्वे आगामी 23 जुलाई तक प्रदेश के सभी जिलों में चलाया जाएगा, जिसके तहत विशेष रूप से तैयार किए गए 'राजधारा सर्वे मोबाइल ऐप' के माध्यम से कुल 51,168 सरकारी प्रगणक घर-घर जाकर ओबीसी परिवारों की वर्तमान सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक, और जनसांख्यिकीय स्थिति के प्रामाणिक आंकड़े जुटाएंगे। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह सर्वे राजस्थान के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आगामी सरपंच, पार्षद और जिला परिषद चुनावों की तकदीर तय करने वाला साबित होगा, क्योंकि इसी डेटा के आधार पर सीटों का नया आरक्षण चार्ट तैयार किया जाएगा।

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पंचायत-निकाय चुनाव टलने की 'वजह' पर लगेगा विराम
गौरतलब है कि राजस्थान में हाल ही में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा द्वारा हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने के बाद स्थानीय चुनाव कराने को लेकर सस्पेंस गहरा गया था। कोर्ट ने पूर्व में 31 जुलाई 2026 तक चुनाव कराने की डेडलाइन दी थी, लेकिन करीब 400 से अधिक ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में ओबीसी, एससी, एसटी और महिलाओं के 50% आरक्षण से जुड़ा सटीक प्रशासनिक डेटा उपलब्ध नहीं होने के कारण चुनाव प्रक्रिया लगातार खिसक रही थी।

आयोग के सचिव अशोक कुमार जैन ने साफ किया है कि इस डिजिटल सर्वे का मुख्य उद्देश्य स्थानीय निकायों में ओबीसी वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से संबंधित बिल्कुल नया और तथ्यात्मक डेटा संकलित करना है। इस डेटा के आने के बाद आयोग सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के विधिक निर्देशों के अनुरूप पूरी तरह पारदर्शी और विधिसम्मत अनुशंसाएँ राज्य सरकार को सौंपेगा, जिससे चुनाव का रास्ता साफ हो जाएगा।

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ऑनलाइन मॉनिटरिंग, डेटा में नहीं होगी गड़बड़ी
आयोग द्वारा विकसित किया गया 'राजधारा सर्वे मोबाइल ऐप' इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से हाई-टेक और पारदर्शी बनाएगा। घर-घर जाने वाले प्रगणक सीधे मौके पर ही निर्धारित प्रपत्र के अनुसार डिजिटल रूप से सूचनाओं का संकलन करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन मॉनिटरिंग और क्वालिटी कंट्रोल सीधे राज्य स्तर पर आयोग द्वारा सुनिश्चित की जाएगी, ताकि आंकड़ों की शुद्धता और विश्वसनीयता पर कोई सवाल न खड़े हो सकें

इससे पहले 7 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला स्तर पर नियुक्त 82 नोडल अधिकारियों, ब्लॉक स्तर के 765 अधिकारियों और 1428 मास्टर ट्रेनर्स को इस ऐप को लेकर विशेष प्रशासनिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

एडीएम को कमान, जिला कलेक्टरों को समन्वय के निर्देश
इस महासर्वे को समय पर और बिना किसी विवाद के पूरा करने के लिए राजस्थान के सभी जिला कलेक्टरों, स्थानीय निकायों और पंचायती राज विभाग को आपस में मजबूत तालमेल बिठाने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रभावी संचालन के लिए प्रत्येक जिले में अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) को मुख्य जिला समन्वयक अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो सीधे प्रगणकों को तकनीकी और प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराएंगे।

आयोग ने साफ किया है कि यदि किसी भी क्षेत्र में तकनीकी समस्या आती है, तो स्थानीय प्रशासन तुरंत बैकअप टीम की मदद से उसे दूर करेगा, क्योंकि 23 जुलाई के बाद समय-सीमा को आगे बढ़ाने की गुंजाइश बेहद कम है।

सही डेटा देने की अपील
यह सर्वेक्षण सीधे तौर पर गांवों की सरकार और शहरों के स्थानीय निकायों के राजनीतिक भविष्य से जुड़ा है, इसलिए आयोग ने प्रदेश के सभी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) परिवारों से विशेष आग्रह किया है कि जब भी प्रगणक उनके घर आएं, वे उन्हें पूरी तरह सही, स्पष्ट और प्रामाणिक जानकारी ही उपलब्ध कराएं।

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इसके साथ ही आयोग ने राजस्थान के सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों से इस महत्वपूर्ण सरकारी काम में सकारात्मक और रचनात्मक सहयोग देने की अपेक्षा की है, ताकि प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भविष्य में बिना किसी कानूनी अड़चन के पंचायत और निकाय चुनाव सुचारू रूप से संपन्न कराए जा सकें।

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