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इंदौर में UPI MDR का विरोध तेज, व्यापारियों ने लगाए पोस्टर; सरकार पर लगाए आरोप

By Admin|19 Sep 2026, 3:03 PM
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इंदौर/ग्वालियर
केंद्र सरकार द्वारा जब से यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एमडीआर यानि मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने की घोषणा की गई है, तब से ही देश भर में व्यापारियों की नाराजगी जाहिर हो रही है. एक तरफ लोग इस नई व्यवस्था से परेशान हैं तो वहीं विपक्ष भी सरकार को निशाने पर लिए हुए है. ग्वालियर में कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. वहीं, इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन से जुड़े व्यापारियों ने दुकानों पर इस संबंध में पोस्टर लगाए हैं। 

इंदौर में व्यापारियों ने लगाए पोस्टर, 125 संगठनों की बैठक
इंदौर में एमडीआर के खिलाफ मैदान में उतरे व्यापारियों का कहना है कि, ''यदि ऐसे भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है तो इससे डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों और व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत का असर पड़ सकता है. इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने बताया कि, ''अभियान के अगले चरण में सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे को आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की तैयारी है. संगठन की ओर से चार दिनों में करीब 10 लाख उपभोक्ताओं को अभियान से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. इसके जरिए व्यापारियों की आपत्ति और उनकी मांग को व्यापक स्तर पर सामने रखने का प्रयास किया जाएगा। 

इंदौर निकलने से पहले सरकार पर निशाना
इंदौर में शनिवार को राहुल गांधी के आने से पहले ही प्रदेश भर से कांग्रेस विधायकों नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी द्वारा बुलाया गया है. ग्वालियर से कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार भी इंदौर पहुंच रहे हैं. लेकिन ग्वालियर से रवाना होने से पहले विधायक सतीश सिकरवार मीडिया से मुखातिब हुए. इस दौरान उन्होंने 15 अक्टूबर को लागू होने जा रहे यूपी ट्रांजेक्शन पर एमडीआर को लेकर सरकार पर हमला बोला। 

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अलग-अलग टैक्स लगाकर सरकार कर रही जनता को परेशान
विधायक सतीश सिकरवार का कहना है कि, ''जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है तब से ही कोई ना कोई टैक्स लगाकर जानता को परेशान किया जा रहा है. पहले के समय में जैसे जज़िया कर लगा करता था, अंग्रेजों के जमाने में भी टैक्स लगते थे. उसी तरह सरकार हिटलरशाही चला रही है और आम आदमी को परेशान करने का काम कर रही है।

एक तरफ ऑनलाइन पेमेंट को बढ़ावा दूसरी और टैक्स की मार
कांग्रेस ने विधायक का कहना है कि, सरकार एक तरफ आम आदमी से ऑनलाइन पेमेंट करने की बात कह रही है. सारा काम नगद में बंद करने की बात कहती है. वहीं दूसरी तरफ इस टैक्स लगाकर जनता के साथ खिलवाड़ कर रही है. ये निंदनीय है आने वाले समय में जनता इसका जवाब जरूर देगी। 

एमपी चेंबर ऑफ कॉमर्स ने की एमडीआर स्थगित करने की मांग
मध्य प्रदेश चैम्बर ऑफ कॉमर्स ग्वालियर के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल का भी कहना है कि, ''डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के चक्कर में पहले ही कई व्यापारी वर्ग कई बार यूपीआई ट्रांजेक्शन से साइबर फ्रॉड्स, उनकी वजह से अकाउंट फ्रीज और फिर रिकवरी जैसी परेशानियों से गुजर रहे हैं. ऐसे में MDR भी व्यापारियों के लिए एक नए टैक्स की तरह होगा. कई बार छोटे व्यापारी को तो एक लाख तक का माल बेचने पर बमुश्किल 500-700 रुपये का ही मुनाफा होता है. ऐसे में एमडीआर की वजह से वह मुनाफा भी एमडीआर में चला जाएगा. इन हालातों को अगर देखा जाए तो व्यापारियों के हित में सरकार को यह नया शुल्क स्थगित करना चाहिए। 

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