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लोक आयुक्त संगठन के 50 साल पूरे, सीएम योगी ने गिनाईं सुशासन और तकनीक से बदलाव की उपलब्धियां

By Admin|14 Sep 2026, 9:06 PM
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लखनऊ

राजधानी लखनऊ में गोमतीनगर स्थित लोक आयुक्त कार्यालय में उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस पर सोमवार को समारोह आयोजित किया गया। इसमें सीएम योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने लोक आयुक्त प्रशासन की स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा ने किया।इस दौरान संगठन की पांच दशक की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में संगठन के गठन से लेकर अब तक की यात्रा, कार्यप्रणाली, शिकायतों की जांच और प्रमुख उपलब्धियों को क्रमवार प्रदर्शित किया गया। यहां बताते चलें कि लोक आयुक्त संगठन भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच में अहम भूमिका निभाता है। समारोह में लोक आयुक्त प्रशासन के अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है किसी संस्था से जुड़ा जन विश्वास 

इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत किसी संस्था से जुड़ा सामान्यजन का विश्वास है। गुड गवर्नेंस आमजन के विश्वास पर निर्भर करता है। उन्होंने सुशासन के लक्ष्यों को भी गिनाया। कहा कि किसी संस्था में सामान्य व्यक्ति बेझिझक आए और नियमानुसार परिणाम को समयबद्ध प्राप्त कर सके। यही हमारी कसौटी होती है। शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो। साथ ही अनावश्यक शिकायत करने वालों पर भी शिकंजा कसने का काम भी हो।
 
जनविश्वास पर खरा उतरना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी 
सीएम ने कहा कि संस्था के गठन मात्र से समस्या का समाधान नहीं होता। जन-विश्वास पर खरा उतरना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी है। संविधान निर्माताओं ने भारत की व्यवस्था के लिए संसदीय लोकतंत्र दिया। यदि जनप्रतिनिधि ने विश्वास खोया तो सरकार गई। 
 
 अनावश्यक शिकायत करने वालों पर कसना होगा शिकंजा 
सीएम ने आगे कहा कि आईजीआरएस, सीएम हेल्पलाइन, जनता दर्शन आदि के जरिये जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान कराया जाता है। हालांकि, कुछ लोग अनावश्यक शिकायत भी लेकर आते हैं, बताते हैं कि मेरी व्यक्तिगत समस्या नहीं है, लेकिन किसी के खिलाफ शिकायत करनी है। यदि हम प्रमाण मांगते हैं तो आनाकानी भी होती है। 

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एक अनुभव साझा करते हुए सीएम ने कहा कि एक सज्जन ने एक विद्यालय के खिलाफ शिकायत की। जांच में शिकायत झूठी निकली तो उन्होंने कहा कि पूरे जिले के विद्यालयों की जांच की जाए। ऐसी झूठी शिकायतों को खारिज किया जाना चाहिए। किसी संस्था को विश्वास के प्रतीक के रूप में स्थापित करने के लिए आवश्यक है कि अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी विश्वास व्यक्त करे कि मेरी समस्या का समाधान होगा।

तकनीक के कारण अब पीडीएस की शिकायत नहीं 

सीएम ने कहा कि लोक आयुक्त संगठन ने टेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग किया है। 2017 में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) में सबसे अधिक शिकायत खाद्यान्न वितरण की आती थी। जनता दर्शन में 100 में से 60 शिकायतें पीडीएस की होती थी। इससे परेशान होकर लगातार हम बैठक करते थे, फिर हमने तकनीक का प्रयोग किया। ई-पॉस मशीन लगाकर उसे मुख्यालय पर स्क्रीन लगाकर जोड़ दिया। इसके बाद यदि 80 हजार राशन कोटे की दुकानों में किसी ने कुछ इधर-उधर किया तो तुरंत अलर्ट आ जाता है। इससे हेराफेरी की गुंजाइश शून्य हो गई।

साढ़े 9 साल में 34 लाख राजस्व मामलों का निस्तारण

सीएम ने राजस्व विभाग के मामलों का भी जिक्र किया। कहा कि 2017 में भूमि संबंधी विवाद, पैमाइश, वरासत, नामांतरण से जुड़े 34 लाख मामले लंबित थे। इससे अनावश्यक विवाद होते थे। केवल वरासत से जुड़े लगभग छह लाख मामले लंबित थे। सभी के निस्तारण की समयसीमा तय की गई। तय किया गया कि लैंड यूज की समस्या का समाधान 30 दिन में नहीं हुआ तो इसे डीम्ड मान लिया जाएगा, यानी गलत होने पर निस्तारण करने वाले की जवाबदेही तय होगी। साढ़े 9 साल में 34 लाख मामले का निस्तारण हुआ, लेकिन 9 साल में 9 लाख और मामले भी सामने आए। वरासत, पैमाइश आदि की समस्याओं का समाधान किया गया। 

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हर तहसील में दिया गया रोबोट 

सीएम ने कहा कि पैमाइश में शिकायत मिली कि लेखपाल ने जरीब में थोड़ा इधर-उधर कर दिया है। अब इस समस्या का भी समाधान हो गया। इसके लिए हर तहसील में रोबोट दे दिया है। इतनी पारदर्शिता हुई कि एक इंच भी कोई इधर-उधर नहीं कर सकता।

टेक्नोलॉजी दिलाएगी शिकायतों के अंबार से मुक्ति 

सीएम ने कहा कि टेक्नोलॉजी का उपयोग कर शिकायतों के अंबार का समाधान निकाल सकते हैं। हो सकता है कि लोकसेवक को बचाने का प्रयास होता है, लेकिन शिकायत जब लोक आयुक्त संगठन के पास जाती है तो वह मेरिट के आधार पर समाधान निकालता है। कई बार जब व्यक्ति को ताकत मिलती है तो वह उदंडतापूर्ण व्यवहार करने लगता है, उस पर अंकुश जरूरी है।  

यूपी में 14 सितंबर 1977 को गठित हुआ लोक आयुक्त संगठन 

सीएम ने कहा कि आजादी के बाद लगा होगा कि आने वाले समय में नेतृत्व देने वाले लोग ही व्यवस्था में गदर मचा डालेंगे, तब इमरजेंसी के तत्काल बाद बनी पहली सरकार ने लोक आयुक्त संगठन के निर्माण की तरफ कदम बढ़ाए। उत्तर प्रदेश में लोक आयुक्त संगठन का विधिवत कार्य 14 सितंबर 1977 को प्रारंभ हुआ। उस समय न्यायमूर्ति विशंभर दयाल ने उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त संगठन को नेतृत्व प्रदान किया था। तबसे प्रारंभ हुई संगठन की यह यात्रा न्यायमूर्ति संजय मिश्र के नेतृत्व में नई पहचान, नई आभा के साथ जारी है।

विश्वास ही लोकतंत्र की असली ताकत 

सीएम ने कहा कि बहुत सारी समस्याओं के समाधान को व्यवस्थित रूप से बढ़ाया गया है। 2014 में सत्ता संभालने के बाद पीएम मोदी ने जनधन अकाउंट खोलने की बात की तो विपक्ष ने खिल्ली उड़ाई। आज जनधन अकाउंट की ताकत सबके सामने है। अब डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में धनराशि जाती है। विश्वास ही लोकतंत्र की असली ताकत है। 

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उन्होंने विधवा, निराश्रित, वृद्धजन की बेचारगी को बताते हुए 2017 के पहले मिलने वाली राशि में घूसखोरी का भी जिक्र करते हुए कहा कि अब यूपी में ऐसा नहीं है। सरकार डीबीटी के माध्यम से सीधे अकाउंट में 1.10 करोड़ लोगों को वार्षिक 12 हजार पेंशन दे रही है। व्यवस्था से बिचौलिए समाप्त कर दिए गए।

इस दौरान लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र, उप लोक आयुक्त शंभू सिंह यादव, दिनेश कुमार सिंह, सुरेंद्र कुमार यादव, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण आदि मौजूद रहे।

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