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CG : दुर्ग में 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को फांसी की सजा…

By kadwaghut|11 Sep 2026, 4:36 PM
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दुर्ग । दुर्ग के मोहन नगर थाना क्षेत्र में 6 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म और हत्या के सनसनीखेज मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी सोमेश यादव (24) को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले को ‘विरलतम से विरलतम’ श्रेणी का अपराध माना।

विशेष दाण्डिक प्रकरण (पॉक्सो) क्रमांक 44/2025 में अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ एफ.टी.एस.सी., विशेष न्यायालय (पॉक्सो), दुर्ग ने 10 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया।

पॉक्सो और BNS की धाराओं में दोषसिद्ध
न्यायालय ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(ड), 5(ढ) सहपठित धारा 6(1) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1), 65(2) और 238(क) के तहत दोषसिद्ध किया।

कोर्ट ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 6(1) और BNS की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड के साथ दोनों धाराओं में ₹5-₹5 हजार का अर्थदंड लगाया। वहीं BNS की धारा 238(क) के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹1,000 अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।

न्यायालय के आदेश के मुताबिक सभी सजाएं एक साथ भुगताई जाएंगी। अर्थदंड नहीं चुकाने पर निर्धारित अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

हाईकोर्ट में होगी मृत्युदंड की पुष्टि
मृत्युदंड की पुष्टि संबंधी प्रक्रिया कानून के अनुसार छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर के समक्ष होगी।

वैज्ञानिक साक्ष्यों से मजबूत हुआ पुलिस का केस
मामले में दुर्ग पुलिस ने बालिका के लापता होने की सूचना मिलते ही तत्काल तलाश शुरू कर दी थी। तकनीकी और मैदानी सूचनाओं के आधार पर पुलिस टीमों ने संभावित स्थानों पर पतासाजी की। तलाश के दौरान बालिका को एक वाहन से बरामद कर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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इसके बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर शव पंचनामा, पोस्टमार्टम समेत आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू की। घटनास्थल को सुरक्षित करते हुए वहां से भौतिक, जैविक, चिकित्सकीय, DNA और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए गए।

पुलिस ने जांच में किसी एक साक्ष्य पर निर्भर रहने के बजाय मौखिक, दस्तावेजी, चिकित्सकीय, परिस्थितिजन्य, जैविक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को एक साथ संकलित किया।

DNA और CCTV साक्ष्य भी बने अहम कड़ी
जांच के दौरान आरोपी के कपड़े और घटनास्थल से मिली सामग्री को सुरक्षित कर वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया। मृतिका के आवश्यक जैविक नमूने, कपड़े, स्वाब, बाल, नाखून समेत संबंधित सामग्री जब्त की गई। आरोपी और संबंधित व्यक्तियों के DNA परीक्षण के लिए नमूने भी लिए गए।

घटनास्थल और आसपास के इलाके के CCTV फुटेज और DVR को सुरक्षित कर जब्त किया गया। जब्त सामग्री को FSL और DNA परीक्षण के लिए भेजा गया। वैज्ञानिक रिपोर्टों को चिकित्सकीय और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ विवेचना में शामिल किया गया।

पुलिस के अनुसार, इस तरह जांच को केवल परिस्थितिजन्य तथ्यों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों से भी पुष्ट किया गया।

आरोपी के मेमोरेण्डम के आधार पर बरामदगी
विवेचना के दौरान आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया गया। आरोपी के मेमोरेण्डम कथन के आधार पर संबंधित वस्तुओं की बरामदगी और जब्ती की गई। पुलिस ने सभी उपलब्ध साक्ष्यों का दस्तावेजीकरण कर अभियोजन के माध्यम से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।

पीड़ित परिवार को ₹7 लाख मुआवजा
न्यायालय ने मृतिका के परिजनों को राज्य सरकार की आहत प्रतिकर योजना के अंतर्गत ₹7 लाख की क्षतिपूर्ति प्रदान किए जाने का निर्देश भी दिया है।

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विशेष टीम ने संभाली थी जांच
मामले की त्वरित कार्रवाई और प्रभावी विवेचना के लिए पुलिस अधीक्षक द्वारा विशेष टीम गठित की गई थी। टीम का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मश्री तंवर और थाना प्रभारी निरीक्षक शिव चंद्रा ने किया।

तलाश, घटनास्थल से साक्ष्य संरक्षण, वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्य जुटाने, आरोपी की गिरफ्तारी, FSL और DNA परीक्षण तथा न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में थाना मोहन नगर के विवेचक समेत पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

न्यायालय में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिल्लीवार ने पैरवी की।

बालिका की पहचान रखी गई गोपनीय
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने अपराध के तरीके से संबंधित अनावश्यक विवरण सार्वजनिक नहीं किए हैं। नाबालिग पीड़िता की पहचान की गोपनीयता बनाए रखने के लिए उसका नाम, फोटो, पता अथवा पहचान उजागर करने वाली कोई जानकारी प्रकाशित नहीं की गई है।

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