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Veer Bal Diwas 2025: वीर बाल दिवस, जानिए क्यों मनाया जाता है इस दिन का इतिहास,

By Manish Kumar|25 Dec 2025, 9:45 PM
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क्या आप जानते हैं कि Veer Bal Diwas 2025 क्यों मनाया जाता है? अगर नहीं, तो जान लें कि यह दिन उन नन्हें वीरों की याद में समर्पित है, जिन्होंने धर्म और न्याय की रक्षा के लिए अपनी जान की आहुति दे दी।

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देशभर में हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी, के चार साहिबजादों के सम्मान में समर्पित है। गुरु जी के छोटे साहिबजादे, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह, ने धर्म की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना शहादत दी। उनकी इस वीरता और बलिदान को याद करने के लिए हर साल यह दिन मनाया जाता है।मुगलों के सामने कभी न झुके साहिबजादे

गुरु गोविंद सिंह जी के चार पुत्र थे – अजीत सिंह, जूझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह। मुगलों के शासनकाल में इनके दो छोटे साहिबजादों को पकड़ लिया गया। उन्हें जबरदस्ती इस्लाम कबूल करने के लिए कहा गया, लेकिन दोनों ने दृढ़ता से इंकार कर दिया।

गुस्से में आकर मुगल शासक सरहिंद के नवाब वजीर खान ने उन्हें जिंदा दीवार में चुनवा दिया। उनकी इस निडरता, त्याग और देशभक्ति के संदेश को फैलाने के लिए ही Veer Bal Diwas 2025 26 दिसंबर को मनाया जाता है।

इतिहास की एक झलक

साल 1699 में, गुरु गोविंद सिंह जी ने बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी, जिसमें उनके पुत्र भी शामिल थे। मुगलों ने गुरु जी को पकड़ने के लिए पूरा जोर लगाया, जिससे परिवार अलग-थलग पड़ गया। दोनों छोटे साहिबजादे अपने माता के साथ एक गुप्त स्थान पर छिपे हुए थे, लेकिन उन्हें पकड़ लिया गया। अत्याचार और कई यातनाओं के बावजूद, दोनों ने धर्म परिवर्तन करने से साफ मना कर दिया। इस बीच उनके बड़े पुत्र पहले ही लड़ाई में शहीद हो चुके थे। अंततः, 26 दिसंबर को बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह को जिंदा दीवार में चुनवा दिया गया।

वीर बाल पुरस्कार और आधुनिक श्रद्धांजलि

भारत सरकार ने 2022 में ऐलान किया कि हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में याद किया जाएगा। पंजाब और देश के कई हिस्सों में स्कूल-कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

पहली बार, बाल पुरस्कार अब 26 दिसंबर, वीर बाल दिवस पर प्रदान किए जाएंगे। इस वर्ष 17 बच्चों को यह सम्मान मिलेगा, और उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा पुरस्कारित किया जाएगा।

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