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17 दिन की ‘डिजिटल कैद’: व्हाट्सऐप कॉल से डराकर बैंक खातों में ट्रांसफर कराए लाखों रुपये

By Admin|17 Apr 2026, 7:42 PM
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 मुजफ्फरपुर

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बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित भगवानपुर स्थित एलएन मिश्रा बिजनेस मैनेजमेंट कॉलेज के रिटायर कर्मचारी हरेंद्र कुमार व उनकी पत्नी कांति देवी को लगातार 17 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर साइबर शातिरों ने करीब 19 लाख रुपये ठग लिए। 26 मार्च की शाम साढ़े चार बजे से लेकर 11 अप्रैल तक उनको कॉल पर रखा। शातिर लगातार 24 घंटे कॉल पर रहा। इस दौरान मुश्किल से दो घंटे भी दंपती सोए नहीं पाते थे। इस संबंध में हरेंद्र ने साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।

उन्होंने पुलिस को बताया है कि एंटी टेरेरिस्ट स्क्वैड (एटीएस) अधिकारी बनकर साइबर शातिरों ने उन्हें 26 मार्च को पहली बार व्हाट्सअप कॉल की। उसने आधार नंबर बताते हुए झांसा दिया कि आपके इस आधार से एक सिम निकाली गई है। इसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधि में की गई है। इसी आधार से केनरा बैंक में एक खाता खोला गया है, जिसमें आतंकी गतिविधि के लिए लेनदेन किए गए हैं। इस तरह एटीएस अधिकारी बनकर गिरफ्तारी की बात बताकर डराने धमकाने लगा। लगातार कॉल पर रखा और इस दौरान वीडियो कॉलिंग भी की। इसके लिए अलग-अलग दो मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल साइबर शातिरों ने किया। 25 मार्च से पांच अप्रैल तक हरेंद्र के मोबाइल पर कॉल की गई। वहीं, उनकी पत्नी के मोबाइल नंबर पर पांच से 11 अप्रैल तक लगातार व्हाटसअप कॉल की गई। इस दौरान उसने कहा कि एक आवेदन दीजिए कि केस की जांच कर मुझे माफ कर दिया जाए। तब हरेंद्र ने यह आवेदन भी दिया। उसने कहा कि इसके लिए रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार बैंक खाते में रुपये भेजने होंगे। डर के कारण हरेंद्र कुमार ने आरटीजीएस के माध्यम से साइबर शातिरों को रुपये भेजे।

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बीते 30 मार्च को हरेंद्र बैंक गए। केरला के कोची शहर में किकोरा एक्सपोर्ट लि. के खाते में 5.60 लाख रुपये लिए। 31 मार्च और एक अप्रैल को बैंक में क्लोजिंग के कारण लेनदेन बंद रहने पर पुन: दो अप्रैल को हरेंद्र को लाइन पर रखकर बैंक ले गया। मुम्बई के गोरेगांव स्थित जेटी शूकर प्रा.लि. के खाते में 7.10 लाख और कर्नाटक के अमीन रोड लाइन एंड इंटरप्राइजेज के खाते में 6.15 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए डालवाए। 18.85 लाख रुपये भेजने के बाद भी केस से निजात दिलाने के नाम पर और रुपये की मांग करने लगा तब हरेंद्र को साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट का आभास हुआ। उन्होंने कॉल काटने के बाद रिश्तेदारों से संपर्क किया और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा
बेटों ने बंधाया ढांढ़स

ठगी के बाद जब सारी कहानी पुत्रों को बताई तो उन्होंने हरेंद्र और उनकी पत्नी को ढांढ़स बंधाया। उन्हें डर था कि शोक व खौफ में कहीं उनके माता-पिता आत्महत्या न कर लें। बेटों ने कहा, रुपये चला गया तो फिर आ जाएंगे।

17 दिनों तक जान जोखिम में, लगता था कुछ कर लेंगे
रिटायर कर्मी हरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें दो पुत्र है। एक इलाहाबाद और एक कोलकाता में बैंक में पोस्टेड है। सभी अपने परिवार के साथ उसी शहर में रहते हैं। वह पति-पत्नी सदर थाना के भगवानपुर यादव नगर के निकट श्रीकृष्ण बिहार कॉलोनी स्थित आवास में रहते हैं। बताया कि 17 दिनों के डिजिटल अरेस्ट के दौरान जान जोखिम में पड़ी रही। साइबर शातिरों के पास उनका केवल आधार कार्ड ही नहीं था। वह पूरे परिवार का ब्योरा लिए हुए थे। इस दौरान किसी रिश्तेदार की कॉल भी आई तो केवल खैरियत वगैर तक ही बात करने दिया।

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साइबर डीएसपी बोले
डिजिटल अरेस्ट की एफआईआर दर्ज कर इंस्पेक्टर आशुतोष प्रसाद को जांच की जिम्मेवारी सौंपी गई है। बैंक खातों का डिटेल लिया जा रहा है। आशंका है कि फर्जी कंपनी के नाम म्यूल एकाउंट खोलकर ठगी की गई है। -हिमांशु कुमार, साइबर डीएसपी

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