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योगी आदित्यनाथ कैबिनेट में 8 नए मंत्रियों की एंट्री संभव, ब्राह्मण-जाट-दलित वोट बैंक पर फोकस

By Admin|10 May 2026, 12:01 PM
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लखनऊ

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उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार अपने सबसे बड़े राजनीतिक दांव की तैयारी में जुट गई है. लंबे समय से चर्चा में चल रहे मंत्रिमंडल विस्तार पर आखिरकार मुहर लग गई है और आज रविवार दोपहर लखनऊ के लोकभवन में नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार शाम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की थी.

योगी कैबिनेट में इस समय छह पद खाली हैं और माना जा रहा है कि इन सभी सीटों को भरा जाएगा. खास बात यह है कि इस बार किसी बड़े प्रयोग के बजाय सामाजिक और जातीय संतुलन साधने पर फोकस रखा गया है. बीजेपी ब्राह्मण, जाट, दलित, पासी, वाल्मीकि, लोधी और अति पिछड़ा वर्ग को साधने की रणनीति पर काम करती दिख रही है. यही वजह है कि जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, वे अलग-अलग सामाजिक समूहों से हैं.

योगी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तस्वीर लगभग साफ होती नजर आ रही है. सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार देर रात सभी संभावित मंत्रियों से मुलाकात कर अंतिम चर्चा कर ली है. मौजूदा राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल की प्रोन्नति लगभग तय मानी जा रही है.

पश्चिम यूपी से आने वाले सोमेंद्र तोमर को कैबिनेट या स्वतंत्र प्रभार मिल सकता है, जबकि पाल बिरादरी से आने वाले सूचना एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री अजीत पाल का भी कद बढ़ाया जा सकता है. वहीं नए चेहरों में कन्नौज के तिर्वा से विधायक और लोधी समाज के नेता कैलाश राजपूत को मंत्रिमंडल में जगह मिलना तय माना जा रहा है. अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक और वाल्मीकि समाज से आने वाले दलित नेता सुरेंद्र दिलेर भी नए मंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं.

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मनोज पांडेय: सपा से BJP तक, अब कैबिनेट की दहलीज पर
रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज पांडेय का नाम लगभग तय माना जा रहा है. कभी अखिलेश यादव के बेहद करीबी रहे मनोज पांडेय समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सपा से दूरी बनाकर बीजेपी का समर्थन किया और बाद में भगवा खेमे के साथ खुलकर खड़े नजर आए.

मनोज पांडेय ब्राह्मण चेहरे के तौर पर बीजेपी के लिए अहम माने जा रहे हैं. राजनीति विज्ञान में पीएचडी कर चुके मनोज पांडेय का लंबा राजनीतिक अनुभव है. 2012 और 2017 में ऊंचाहार सीट से जीत हासिल कर चुके पांडेय अब बीजेपी के ब्राह्मण समीकरण को मजबूत करने वाले चेहरे के रूप में देखे जा रहे हैं.

भूपेंद्र चौधरी: पश्चिम यूपी का बड़ा जाट चेहरा
मुरादाबाद से आने वाले भूपेंद्र सिंह चौधरी बीजेपी के मजबूत संगठनात्मक नेताओं में गिने जाते हैं. आरएसएस से राजनीति की शुरुआत करने वाले भूपेंद्र चौधरी साल 1989 में बीजेपी में शामिल हुए थे. संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां निभाने के बाद वे यूपी बीजेपी अध्यक्ष भी बने.

जाट समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. पश्चिमी यूपी में बीजेपी को मजबूत करने में उनकी बड़ी भूमिका रही है. योगी सरकार के पिछले कार्यकाल में वे पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि उन्हें फिर से कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है.

कृष्णा पासवान: पासी समाज की मजबूत महिला चेहरा
फतेहपुर जिले की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है. पासी समाज से आने वाली कृष्णा पासवान बीजेपी की पुराने दलित चेहरों में शामिल हैं. उन्होंने कई बार चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की है.

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2022 के चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी उम्मीदवार को करीबी मुकाबले में हराया था. बीजेपी दलित वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने के लिए पासी समाज को प्रतिनिधित्व देना चाहती है. इसी रणनीति के तहत कृष्णा पासवान का नाम आगे बढ़ाया गया है.

हंसराज विश्वकर्मा: अति पिछड़े वर्ग पर BJP की नजर
वाराणसी से एमएलसी और बीजेपी जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा का नाम भी चर्चा में है. विश्वकर्मा समाज पूर्वांचल की अहम अति पिछड़ी बिरादरी मानी जाती है. हंसराज विश्वकर्मा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी नेताओं में भी गिना जाता है.

बीजेपी लंबे समय से गैर-यादव OBC वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. ऐसे में विश्वकर्मा समाज को कैबिनेट में जगह देकर पार्टी पूर्वांचल और अति पिछड़े वर्ग को बड़ा संदेश देना चाहती है.
 

सुरेंद्र दिलेर: वाल्मीकि समाज से नया दांव
हाथरस से आने वाले सुरेंद्र सिंह दिलेर का नाम वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधि के तौर पर चर्चा में है. उनका राजनीतिक परिवार लंबे समय से सक्रिय रहा है. उनके दादा किशन लाल दिलेर चार बार सांसद रहे, जबकि पिता राजवीर सिंह दिलेर विधायक और सांसद दोनों रहे.

सुरेंद्र दिलेर लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं और वाल्मीकि समाज में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. बीजेपी दलित वोट बैंक में वाल्मीकि समुदाय को मजबूत संदेश देना चाहती है.

कैलाश राजपूत: लोधी वोट बैंक साधने की कोशिश
कन्नौज की तिर्वा सीट से विधायक कैलाश राजपूत भी संभावित मंत्रियों की सूची में शामिल हैं. वे लोधी समाज से आते हैं, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली समुदाय माना जाता है. कैलाश राजपूत अलग-अलग दौर में हर बार सत्ता पक्ष के साथ रहे हैं. साल 1996 में बीजेपी, 2007 में बसपा और फिर 2017 में बीजेपी से विधायक बने. इसके बाद फिर से विधायक बने. कन्नौज और आसपास के इलाकों में लोधी वोट बैंक पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है.

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चर्चा में रहा मनोज पांडे का नाम
प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार में जहां छह और मंत्री बनाए जा सकते हैं, वहीं मौजूदा राज्यमंत्रियों में से कुछ को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और तीन को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है. सपा से अलग होकर भाजपा को समर्थन देने वाले विधायक मनोज पांडे का नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा है. लोकसभा चुनाव के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने भी मनोज पांडे और उनके परिवार से भेंट की थी. तभी से माना जा रहा था था कि उन्हें बीजेपी या सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी.

मनोज पांडे कल शाम लखनऊ आवास पहुंचे और सूत्रों के मुताबिक, सीएम योगी से मुलाकात की है. हालांकि, मुलाकात के बाद रात लगभग 10 बजे वह वापस रायबरेली लौट गए. माना जा रहा है कि दोपहर तक वह वापस शपथ ग्रहण से पहले रायबरेली से पूजा पाठ कर लखनऊ पहुंचेंगे. वर्तमान में मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित कुल 54 मंत्री हैं. राज्य में विधायकों की संख्या को देखते हुए अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं.

2027 चुनाव से पहले बड़ा सियासी संदेश

योगी सरकार का यह मंत्रिमंडल विस्तार 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की बड़ी सामाजिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. पार्टी एक साथ ब्राह्मण, जाट, दलित, पासी, वाल्मीकि और अति पिछड़े वर्ग को साधने की कोशिश में जुटी है. योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 8 मंत्री शपथ ले सकते हैं, जिनमें 6 नए चेहरे होंगे. दो राज्य मंत्रियों का प्रमोशन कर उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है.

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