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भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद बड़ा कदम, यूनियन कार्बाइड परिसर की वैज्ञानिक जांच फिर शुरू; सामने आएंगे जहरीले तत्व

By Admin|12 Sep 2026, 9:01 AM
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भोपाल
 दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदियों में शामिल भोपाल गैस त्रासदी के चार दशक बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर की मिट्टी और पानी की एक बार फिर वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी। जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि इतने वर्षों बाद भी परिसर में प्रदूषण की स्थिति क्या है और जमीन के नीचे अथवा परिसर में मौजूद तालाबों के पानी में जहरीले रासायनिक तत्व तो मौजूद नहीं हैं।

जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि फैक्ट्री परिसर की जमीन का इस्तेमाल गैस पीड़ितों के स्मारक, अस्पताल या अन्य कार्यों के लिए किया जा सकता है या नहीं। सरकार ने परीक्षण का जिम्मा गुजरात की एक कंपनी को सौंपा है। कंपनी जल्द ही अलग-अलग स्थानों से नमूने लेकर जांच शुरू करेगी। इस पूरी प्रक्रिया पर करीब 2.65 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

87 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित है स्मारक और अस्पताल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रासायनिक कचरा हटाए जाने के बाद इसी वर्ष जनवरी में यूनियन कार्बाइड परिसर की खाली जमीन पर गैस त्रासदी के पीड़ितों की स्मृति में स्मारक और अस्पताल बनाने की घोषणा की थी। फैक्ट्री परिसर में कुल 87 एकड़ जमीन है।

अब इस जमीन के भविष्य के उपयोग से पहले एक बार फिर पर्यावरणीय स्थिति का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है। जांच में मिट्टी के साथ भूजल और परिसर में बने तालाबों के पानी के नमूनों की भी जांच की जाएगी, ताकि किसी तरह के रासायनिक अवशेष की मौजूदगी का पता लगाया जा सके।

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2010 की जांच में मिले थे पारा और कीटनाशक
इससे पहले वर्ष 2010 में राष्ट्रीय पर्यावरणीय शोध संस्थान (नीरी), नागपुर ने परिसर की मिट्टी की जांच की थी। इसके अलावा फैक्ट्री परिसर के बाहर भूजल के 30 नमूने लेकर उनका परीक्षण किया गया था।

तब कुछ नमूनों में पारा (मर्करी) समेत कुछ कीटनाशक निर्धारित मात्रा से अधिक पाए गए थे। ऐसे में चार दशक बाद होने वाली नई जांच से यह स्पष्ट होगा कि मौजूदा समय में परिसर और उसके आसपास प्रदूषण की स्थिति क्या है।

टेंडर पर भी उठे सवाल
वहीं, एक संगठन से जुड़ी रचना ढींगरा ने जांच के लिए कंपनी के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अदालत ने इसके लिए ग्लोबल टेंडर किए जाने की आवश्यकता बताई है। सरकार की ओर से गुजरात की कंपनी को जांच का काम सौंपा गया है।

अब नई जांच की रिपोर्ट पर यह तय होगा कि त्रासदी के चार दशक बाद यूनियन कार्बाइड परिसर की 87 एकड़ जमीन को स्मारक और अस्पताल जैसे सार्वजनिक उपयोग में लाने के लिए पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित माना जा सकता है या नहीं।

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