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55 साल, 138 डिग्रियां और 11 वर्ल्ड रिकॉर्ड्स: राजस्थान के ‘महा पढ़ाकू’ दशरथ सिंह की अद्भुत कहानी

By Admin|14 Apr 2026, 10:52 AM
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झुंझुनू 
आज के दौर में जब एक ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी करने में अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं, किताबें देख कर सिर घूमने लगता है और साल दर साल एक ही विषय पढ़ते-पढ़ते लोग ऊब जाते हैं, वहीं राजस्थान की वीर धरा से एक व्यक्ति ने डिग्रियों की झड़ी लगा दी है. हम बात कर रहे हैं पूर्व सैनिक दशरथ सिंह की, जिन्होंने अपनी मेहनत से कॉलेज और यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड बुक ही बदल डाले. जहां, लोग एक डिग्री के लिए रातों-रात जागते हैं, वहां इस जांबाज ने 55 साल की उम्र में 138 डिग्रियां अपने नाम कर ली हैं. उच्च शिक्षा क्षेत्र में उन्होंने 11 वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए हैं. इसलिए इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड में उनका नाम शामिल हो चुका है। 

देश सेवा में सबसे आगे रहने वाले राजस्थान के वीर सपूत वैसे तो आए दिन नए कीर्तिमान हासिल करते हैं. दुश्मनों से लोहा लेने की बात हो या खेती की बात हमेशा नए टेक्नोलॉजी का विकास करते रहते हैं. लेकिन झुंझुनू जिले के नवागढ़ तहसील के खीरोड़ गांव के रहने वाले एक किसान परिवार के दशरथ सिंह ने 55 साल की उम्र में 138 डिग्रियां हासिल की है. साल 1988 में उन्होंने भारतीय सेवा ज्वाइन की और 16 साल तक पंजाब जम्मू कश्मीर सहित कई राज्यों में देश की सेवा के लिए तैनात रहे। 

सेना में रहते हुए जारी रखी पढ़ाई 

सेना में रहते हुए भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और हर साल मिलने वाले 2 महीने की छुट्टी का उपयोग करते हुए परीक्षा दी और पढ़ाई की. साल 2004 में प्रोसेशन से रिटायर हो गए. इसके बाद उन्होंने पूरा ध्यान अपनी शिक्षा पर लगाया लगातार वो अपनी पढ़ाई करते रहे. उन्होंने बीकॉम, एलएलबी, एलएलएम, बीजेएमसी, B.Ed सहित कई डिग्री हासिल की हैं। 

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52 सर्टिफिकेट, 13 डिप्लोमा… 
दशरथ सिंह का दावा है कि वो अभी तक तीन पीएचडी, 7 विषय में ग्रेजुएशन डिग्री और 46 पोस्ट ग्रैजुएट डिग्री, 23 डिप्लोमा, 7 मिलिट्री स्टडीज डिग्री और 52 सर्टिफिकेट ले चुके हैं. सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई पर फोकस रखा. उन्होंने बताया कि उन्होंने इग्नू, जैन विश्वविद्यालय भारतीय संस्थान और अन्य विश्वविद्यालय से अपनी डिग्रियां की हैं. एक किसान परिवार में उनका जन्म हुआ. परिवार के आर्थिक हालत ठीक नहीं थी. फिर भी उन्होंने किसी तरह से सरकारी स्कूल से 10वीं तक पढ़ाई की. पढ़ाई करने में उनको दिक्कत आ रही थी लेकिन उसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपनी पढ़ाई जारी रखी. उन्होंने बताया की वो सेना के सब शक्ति कमान में लीगल एडवाइजर के रूप में भी काम कर चुके हैं. साथ ही अब सेनारत और रिटायर्ड सैनिकों के न्यायालय से जुड़े मामलों को संभालते हैं। 

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