मध्य प्रदेशराज्‍य

एमपीएसईडीसी और आईआईएसईआर भोपाल ने ड्रोन क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों के साथ इंडस्ट्री राउंडटेबल की आयोजित

By Admin|02 Sep 2026, 9:56 PM
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भोपाल 

मध्यप्रदेश को ड्रोन निर्माण, परीक्षण, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में राज्य शासन द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) द्वारा आईआईएसईआर भोपाल एवं ड्रोन क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों के साथ उच्चस्तरीय इंडस्ट्री राउंडटेबल आयोजित किया गया। प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  एम. सेल्वेंद्रन ने चर्चा में सहभागिता करते हुए ड्रोन क्षेत्र के विकास, निवेश और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राज्य शासन की प्राथमिकताओं को साझा किया।

राउंडटेबल में ड्रोन क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों, स्टार्टअप्स, उद्योग संगठनों, अनुसंधान संस्थानों और इकोसिस्टम से जुड़े प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। इनमें गरुड़, डीएफआई, आइडियाफोर्ज, एनएफएसयू, प्रखर और आईजेडआई सहित अनेक कंपनियों एवं संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रतिभागियों ने प्रदेश में ड्रोन निर्माण, परीक्षण, अनुसंधान एवं नवाचार के लिए सशक्त इकोसिस्टम विकसित करने संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में ड्रोन क्षेत्र के लिए आवश्यक अधोसंरचना, परीक्षण एवं प्रमाणन सुविधाएं, कौशल विकास, अनुसंधान सहयोग और ग्वालियर में प्रस्तावित ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग एंड टेस्टिंग क्लस्टर के विकास पर विस्तार से चर्चा हुई।

मध्यप्रदेश को बनाया जाएगा ड्रोन प्रौद्योगिकी का प्रमुख केंद्र

बैठक में प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, कुशल मानव संसाधन, रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और प्रगतिशील नीतिगत ढांचे का लाभ उठाते हुए मध्यप्रदेश को ड्रोन प्रौद्योगिकी के लिए देश के पसंदीदा गंतव्यों में शामिल करने के रोडमैप की जानकारी दी गई। इसमें ड्रोन निर्माण के लिए अधोसंरचना, साझा परीक्षण सुविधाएं, फ्लाइट टेस्टिंग क्षमताएं, नवाचार प्लेटफॉर्म और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रतिभा एवं कौशल विकास को शामिल किया गया है।

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आईआईएसईआर भोपाल में स्थापित होगा ड्रोन टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

राउंडटेबल में आईआईएसईआर भोपाल में ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने के राज्य शासन के निर्णय को सराहा गया। इसका उद्देश्य उन्नत अनुसंधान, उत्पाद विकास, स्टार्टअप इनक्यूबेशन, प्रौद्योगिकी सत्यापन और नई पीढ़ी के ड्रोन अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना है। जुलाई 2026 में मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने लगभग 85.51 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को स्वीकृति दी है। इसमें एआई, ऑटोनॉमस सिस्टम्स, ड्रोन सिमुलेशन, डिजिटल ट्विन्स, यूएवी डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर कार्य किया जाएगा। साथ ही प्रोटोटाइप परीक्षण, प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और उभरती प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को भी सहयोग मिलेगा।

ग्वालियर में विकसित होगा एकीकृत ड्रोन क्लस्टर

ग्वालियर में प्रस्तावित ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग एंड टेस्टिंग क्लस्टर में ड्रोन निर्माण, प्रोटोटाइपिंग, कंपोनेंट टेस्टिंग, प्रमाणन और फ्लाइट टेस्टिंग के लिए एकीकृत अधोसंरचना विकसित की जाएगी। हितधारकों ने कॉमन मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं, कंपोनेंट टेस्टिंग लैब, फ्लाइट टेस्टिंग अधोसंरचना और उद्योग आधारित कौशल विकास को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। कई प्रतिभागियों ने ड्रोन निर्माण, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार, पायलट प्रोजेक्ट्स और प्रतिभा विकास के क्षेत्र में राज्य के साथ साझेदारी में रुचि व्यक्त की।

सुझावों को ड्रोन रोडमैप में किया जाएगा शामिल

इंडस्ट्री राउंडटेबल से प्राप्त सुझावों को प्रदेश के ड्रोन इकोसिस्टम के विकास के लिए तैयार किए जा रहे रोडमैप में शामिल किया जाएगा। ये सुझाव ग्वालियर क्लस्टर, आईआईएसईआर भोपाल के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, ड्रोन क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और उच्च मूल्य वाले रोजगार के अवसर सृजित करने की आगामी पहलों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे। बैठक में मध्यप्रदेश ड्रोन प्रमोशन एंड यूसेज पॉलिसी-2025 के महत्व को भी रेखांकित किया गया। नीति का उद्देश्य निवेश, नवाचार, कौशल विकास, प्रमाणन सहयोग तथा कृषि, लॉजिस्टिक्स, अधोसंरचना, सुशासन, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक अनुप्रयोगों में ड्रोन तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना है।

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