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BJP उम्मीदवार घोषित होते ही दतिया में हंगामा, NH-44 पर 15 किलोमीटर चक्का जाम से थमा यातायात

By Admin|11 Jul 2026, 11:06 AM
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दतिया

दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आ गया है। पार्टी द्वारा उम्मीदवार की घोषणा के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने से उनके समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई है। इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।

नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटते ही शुरू हुआ विरोध
भाजपा द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने खुलकर नाराजगी जताई। विरोध के बीच भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा संगठन के कई पदाधिकारियों और दतिया नगर के पार्षदों ने भी इस्तीफे की घोषणा कर दी।

समर्थकों ने किया प्रदर्शन, NH-44 पर लगाया जाम
पार्टी के फैसले के विरोध में नाराज समर्थक सड़क पर उतर आए। उन्होंने नेशनल हाईवे-44 पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि टिकट वितरण में लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं की भावनाओं की अनदेखी की गई है।

उपचुनाव की वजह
उपचुनाव की वजह कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की अयोग्यता है. बैंक फ्रॉड मामले में कोर्ट ने उन्हें सजा दी, जिसके बाद सीट खाली हुई. 30 जुलाई को वोटिंग होनी है. कांग्रेस अभी अपना उम्मीदवार घोषित नहीं कर पाई है। 

नरोत्तम मिश्रा
नरोत्तम मिश्रा दतिया में मजबूत नेता माने जाते हैं. 2023 के चुनाव में वे कांग्रेस के भारती से हारे थे, लेकिन अब वापसी की तैयारी में थे. उन्होंने नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया था. टिकट कटने से उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है। 

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आशुतोष तिवारी
आशुतोष तिवारी RSS से जुड़े हैं और पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं. टिकट मिलने के बाद उन्होंने मिश्रा का आशीर्वाद मांगा, लेकिन जमीनी स्तर पर समर्थक मानने को तैयार नहीं. यह फैसला पार्टी की आंतरिक रणनीति का हिस्सा लगता है। 

प्रदर्शन के दौरान बाजार बंद रहे. ग्वालियर-झांसी हाईवे पर भी असर पड़ा. महिला कार्यकर्ताओं ने भी विरोध में हिस्सा लिया. पुलिस ने जाम खोलने की कोशिश की. स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। 

मिश्रा के समर्थक पार्टी से वफादार रहे हैं, लेकिन टिकट विवाद ने दरार पैदा कर दी. पार्टी हाईकमान अब स्थिति संभालने में जुटा है. अगर बगावत जारी रही तो BJP को नुकसान हो सकता है. आगे क्या होता है, यह देखना होगा. कुल मिलाकर यह स्थानीय नेतृत्व और हाईकमान के बीच टकराव का उदाहरण है। 

बीजेपी नेता का पुलिस पर आरोप
भाजपा के जिला मंत्री भानु सिंह ने आजतक से बात करते हुए कहा, ' हम लोग शांतिपूर्ण तरीके से भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से ये मांग कर रहे थे कि दतिया का जो टिकट हुआ है उसे वापस लिया जाए और नरोत्तम मिश्रा जी को टिकट दिया जाए. हम संवैधानिक तरीके से अपनी मांग रख रहे थे. हम लोगों ने पूरी रात रामधुन गाकर भारतीय जनता पार्टी से मांग करते हुए कहा कि टिकट नरोत्तम जी को दिया जाए लेकिन पुलिस प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और दतिया कलेक्टर की बर्बरता देखिए कि भाजपा के कार्यकर्ताओं को दफ्तर में कैद कर दिया. जब तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा जी को टिकट नहीं मिलेगा तब तक हम लोग चक्का जाम करेंगे। 

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क्यों नाराज हैं नरोत्तम मिश्रा के समर्थक?
दरअसल, बीजेपी ने शुक्रवार को दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए सीनियर नेता नरोत्तम मिश्रा का पत्ता काटते हुए आशुतोष तिवारी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया. पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों को पूरा भरोसा था कि टिकट उन्हें ही मिलेगा और उन्होंने नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया था। 

जैसे ही आशुतोष तिवारी के नाम का ऐलान हुआ, नरोत्तम मिश्रा के समर्थक सड़कों पर उतर आए. कुछ समर्थक शर्ट उतारकर सड़क पर लेट गए और 'नरोत्तम दादा' को टिकट न मिलने पर बीजेपी छोड़ने तक की धमकी देने लगे. हालांकि, टिकट मिलने के बाद आशुतोष तिवारी ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा उनके अभिभावक हैं और उन्होंने उनके लिए चुनाव प्रचार करने की बात कही है। 

क्यों हो रहा है दतिया में उपचुनाव? 
साल 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेता राजेन्द्र भारती ने तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,500 से अधिक वोटों से हरा दिया था. लेकिन इसी साल (2026) अप्रैल में दिल्ली की एक अदालत ने राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक मामले में 3 साल की सजा सुना दी. सजा मिलने के कारण राजेंद्र भारती की विधायकी रद्द हो गई, जिसके चलते दतिया सीट खाली हो गई और यहां उपचुनाव हो रहा है. यहां 30 जुलाई को वोट डाले जाएंगे औऱ 3 अगस्त को नतीजे घोषित होंगे.

 

उपचुनाव से पहले बीजेपी के लिए बढ़ी चुनौती
दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले भाजपा के भीतर बढ़ता असंतोष पार्टी के लिए चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को समय रहते नहीं मनाया गया, तो इसका असर चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।

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अब पार्टी नेतृत्व के फैसले पर नजर
दतिया में बढ़ते विरोध के बाद अब सभी की नजर भाजपा नेतृत्व पर टिकी है। पार्टी किस तरह नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चुनावी मैदान में उतरती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। वहीं, विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

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