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UPCOS से आउटसोर्स कर्मियों को मजबूत सुरक्षा, नौकरी की निरंतरता और सामाजिक सुरक्षा का भरोसा

By Admin|02 Sep 2026, 7:01 PM
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नौकरी की सिक्योरिटी, भविष्य की भी चिंता… आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को योगी सरकार का 'सुरक्षा कवच'

पूरी व्यवस्था को संस्थागत और डिजिटल ढांचे से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा कदम 

वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां अब अधिक स्पष्ट और जवाबदेह ढांचे में होंगी

लखनऊ

नौकरी सिर्फ हर महीने मिलने वाली तनख्वाह का नाम नहीं होती। नौकरी के साथ कर्मचारी को अपने भविष्य की चिंता होती है, परिवार की जिम्मेदारी होती है और यह भरोसा भी चाहिए होता है कि उसकी मेहनत का रिकॉर्ड सुरक्षित है, उसका वेतन समय पर मिलेगा और जरूरत पड़ने पर उसके अधिकारों की सुनवाई करने वाली कोई व्यवस्था मौजूद है।

आउटसोर्सिंग व्यवस्था में काम करने वाले कर्मचारियों के सामने लंबे समय से यही सबसे बड़ी चिंता रही है। वेतन, EPF, ESIC और सेवा संबंधी दूसरी सुविधाओं को लेकर भी असमंजस की स्थिति रहती थी। अब योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को एक संस्थागत और डिजिटल ढांचे से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम यानी UPCOS का शुभारंभ किया। इसके साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और शिकायत निस्तारण जैसी व्यवस्थाओं को एक व्यवस्थित ढांचे में लाने की शुरुआत हुई है।

एक कर्मचारी, एक डिजिटल व्यवस्था
UPCOS के जरिए सरकारी विभाग, आउटसोर्सिंग एजेंसियां और कर्मचारी एक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था से जुड़ेंगे। मैनपावर की जरूरत का आकलन, रिक्तियों का पूर्वानुमान और उसके अनुसार मानव संसाधन की योजना भी बनाई जाएगी।
भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी, योग्यता और मेरिट आधारित होगी तथा राज्य सरकार की आरक्षण नीति का पालन किया जाएगा। SC, ST, OBC, दिव्यांगजन, महिलाओं, EWS, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों और पूर्व सैनिकों के लिए नियमों के अनुसार आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।

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कर्मचारी अपने सर्विस डिटेल, बैंक अकाउंट, उपस्थिति, भुगतान और अन्य जानकारी एक ही जगह देख सकेगा। वह अपनी शिकायत भी दर्ज कर सकेगा, उसकी स्थिति ट्रैक कर सकेगा और समयबद्ध समाधान की व्यवस्था होगी।

हर महीने 5 तारीख तक वेतन
नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू समय पर पारिश्रमिक से जुड़ा है। आउटसोर्स कर्मचारियों को हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच पारिश्रमिक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। भुगतान सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में पहुंचाने का प्रावधान है।
EPF और ESIC से जुड़े कर्मचारियों के खाते खुलवाना और नियमित रूप से अंशदान जमा कराना भी व्यवस्था का हिस्सा होगा। एजेंसियों को इसका प्रमाण भी निगम को निर्धारित समय में देना होगा। यानी कर्मचारी के वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों को अब अधिक स्पष्ट और जवाबदेह ढांचे में लाया जा रहा है।

मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकेगा कर्मचारी
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक नौकरी की असुरक्षा भी रही है। नई व्यवस्था में कर्मचारी को मनमाने ढंग से हटाने पर रोक लगाई गई है। आउटसोर्सिंग एजेंसी किसी कर्मचारी को अपने स्तर से नहीं हटा सकेगी। अनुशासनहीनता या दंडनीय अपराध जैसी परिस्थितियों में भी संबंधित विभाग या संस्था और निगम की सहमति के बाद ही कार्रवाई की जा सकेगी।

प्रशिक्षण और मेरिट आधारित चयन
नई व्यवस्था केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं है। कर्मचारियों की कार्यक्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण देने की भी व्यवस्था की गई है। सेवायोजन विभाग के पोर्टल के माध्यम से उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। योग्यता, दक्षता और तय मानकों के आधार पर पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। श्रेणी-3 और श्रेणी-4 के पदों के लिए साक्षात्कार नहीं होगा। विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को चयन प्रक्रिया में वरीयता देने का भी प्रावधान है।

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मातृत्व अवकाश और वैधानिक सेवा लाभ
नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए केवल वेतन और नौकरी की बात नहीं की गई है। मातृत्व अवकाश सहित अन्य वैधानिक सेवा लाभों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था की गई है। EPF, ESIC और बैंकिंग से जुड़ी अनुमन्य सुविधाओं को भी कर्मचारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी तय की गई है।

₹40 लाख तक का दुर्घटना बीमा
UPCOS के साथ सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ाया गया है। भारतीय स्टेट बैंक के साथ हुए एमओयू के माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। निर्धारित वेतन श्रेणियों के अनुसार कर्मचारी को लगभग ₹40 लाख तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा मिलेगा। स्थायी आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में भी निर्धारित बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी।
इसके अलावा जलने की स्थिति में प्लास्टिक सर्जरी के लिए ₹10 लाख तक, आकस्मिक दवाओं के लिए ₹5 लाख तक और आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस के लिए ₹10 लाख तक की सुविधा शामिल है।

कर्मचारी के बाद परिवार की भी चिंता
इस व्यवस्था की सबसे अलग बात यह है कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा कर्मचारी तक ही सीमित नहीं रखा गया है। किसी बड़ी अनहोनी की स्थिति में उसके परिवार के लिए भी आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई है। कर्मचारी के पुत्र की शिक्षा के लिए ₹8 लाख तक और पुत्री की शिक्षा के लिए ₹10 लाख तक सहायता का प्रावधान है। दो पुत्रियों के विवाह के लिए ₹8 से ₹10 लाख तक की सहायता और कर्मचारी के अंतिम संस्कार के लिए ₹50 हजार तक की व्यवस्था की गई है।
कर्मचारी और उसके परिवार के लिए जीरो बैलेंस बैंक खाते की सुविधा भी उपलब्ध होगी। वेतन खाते के माध्यम से परिवार के अधिकतम चार सदस्यों को विशेष योजनाओं का लाभ देने की व्यवस्था भी की गई है।

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बिचौलियों की जगह जवाबदेह व्यवस्था

UPCOS का बड़ा उद्देश्य आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कर्मचारी, एजेंसी और विभाग के बीच जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना भी है। एजेंसियों का चयन और इंपैनलमेंट तय प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। विभाग, निगम और एजेंसी के बीच त्रिपक्षीय व्यवस्था के माध्यम से जवाबदेही तय होगी। भर्ती से लेकर पोस्टिंग, उपस्थिति, वेतन, ग्रेच्युटी, बीमा और दूसरी सेवा सुविधाओं का डिजिटल प्रबंधन और निगरानी की जाएगी। इसका सीधा अर्थ है कि कर्मचारी को अपनी सेवा से जुड़ी जानकारी के लिए अलग-अलग दफ्तरों और लोगों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 

3.5 लाख कर्मचारियों को सीधा फायदा

योगी सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत करीब 3.50 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधा फायदा होगा। अब इन कर्मचारियों को समय पर वेतन के साथ ही सुरक्षा की गारंटी और भविष्य की सिक्योरिटी भी मिलेगी।

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