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आदिवासी भूमि सौदे में गड़बड़ी की आशंका, कलेक्टर ने जांच के दिए निर्देश

By Admin|11 Jun 2026, 10:46 PM
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छिंदवाड़ा

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मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में राजस्व अधिकारियों ने मिलीभगत कर भारिया जनजाति के परिवार की 6.60 करोड़ की 11 एकड़ जमीन मात्र छह लाख रुपये में खरीद ली। प्रमुख पर्यटन स्थल तामिया में यह जमीन चौरा पठार और पातालकोट व्यू पॉइंट के पास सड़क किनारे स्थित है, जिसे तत्कालीन तहसीलदार उमराव वारले की पत्नी प्रियंका वारले, बीएमओ जितेंद्र शाह और जुन्नारदेव एसडीएम कामिनी ठाकुर के पिता दिलीप सिंह (सभी आदिवासी) के नाम पर खरीदा गया है। शिकायत पर कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने जांच के आदेश दिए हैं।
पहले मांगी, फिर साजिश कर ई-केवाईसी के बहाने ले ली जमीन

दरअसल, भारिया परिवार की यहां 22 एकड़ पुश्तैनी जमीन है। पिता नान्हों भारती की मौत के बाद पुत्री विप्पा भारती और सिमिना बाई के बीच सीमांकन और बंटवारे को लेकर सालों से विवाद चल रहा था। दोनों की मौत के बाद वारिस बढ़े तो विवाद भी गहरा गया। इसी बीच सिमिना बाई के पुत्र रामदास भारती ने 11 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री करा दी।

पीड़ित परिवार के सदस्य बिसन लाल भारती का आरोप है कि जुन्नारदेव एसडीएम पिछले साल उनके घर जमीन मांगने आई थीं। मना करने पर तत्कालीन पटवारी लेखराम यदुवंशी और कोटवार ने सरकारी योजना के लिए ई-केवाईसी के नाम पर कोरे कागजों पर अंगूठे और दस्तखत ले लिए। बाद में उनका इस्तेमाल कर जमीन का बंटवारा करवा दिया। बता दें कि तहसील ऑफिस में दो मई 2025 को नामांतरण के लिए आवेदन पहुंचा और 30 मई को नामांतरण हो गया। दो जुलाई 2025 को रजिस्ट्री हो गई। इसके बाद अधिकारियों के परिवार के नाम जमीन हो गई।
60 लाख रुपये प्रति एकड़ है जमीन की वास्तविक कीमत

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तामिया स्थित इस जमीन का बाजार मूल्य 60 लाख रुपये प्रति एकड़ और शासकीय गाइडलाइन में करीब 27 लाख रुपये प्रति एकड़ है। यानी व्यावसायिक उपयोग की यह 11 एकड़ जमीन करीब 6.60 करोड़ रुपये होती है, जिसे छह लाख रुपये (तीन लाख चेक और तीन लाख नकद) में खरीदा गया है।

 

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