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CG : दुर्ग में सियासी संग्राम: ‘अहमदाबाद से सरकार’ बनाम ‘छत्तीसगढ़ एटीएम’ पर बघेल-यादव आमने-सामने …

By kadwaghut|04 May 2026, 12:39 PM
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दुर्ग । अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के मौके पर दुर्ग में राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश के मंत्री गजेंद्र यादव के बीच तीखी बयानबाजी सामने आई। दोनों नेताओं ने श्रमिकों, विकास और शासन व्यवस्था को लेकर एक-दूसरे पर जमकर निशाना साधा।

राजीव भवन में ‘बोरे बासी’ कार्यक्रम के दौरान भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार के ढाई साल के कार्यकाल को “कुशासन” बताते हुए आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ की सरकार राज्य से नहीं, बल्कि अहमदाबाद से संचालित हो रही है।

इस पर पलटवार करते हुए मंत्री गजेंद्र यादव ने कांग्रेस पर हमला बोला और कहा कि पहले यह स्पष्ट किया जाए कि उनकी सरकार कहां से संचालित होती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में छत्तीसगढ़ को “एटीएम” की तरह इस्तेमाल किया गया और राज्य के संसाधनों का उपयोग दूसरे राज्यों के चुनावों में किया गया।

गुजरात मॉडल बनाम छत्तीसगढ़ मॉडल
मंत्री यादव ने “गुजरात मॉडल” का हवाला देते हुए कहा कि विकास के सफल मॉडलों को अपनाने में कोई हानि नहीं है। उन्होंने नहर, शिक्षा और राजस्व व्यवस्था में गुजरात के कार्यों को उदाहरण के रूप में पेश किया।

“सुशासन तिहार” पर विवाद
भूपेश बघेल ने राज्य सरकार के “सुशासन तिहार” पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है और यह पारंपरिक त्योहारों का राजनीतिक उपयोग प्रतीत होता है।

‘बोरे बासी’ पर भी सियासत
बघेल ने ‘बोरे बासी’ को छत्तीसगढ़ की संस्कृति और श्रमिकों की पहचान बताते हुए इसे गर्मी में “अमृत” कहा और याद दिलाया कि उनकी सरकार ने इसे “बोरे बासी दिवस” के रूप में मान्यता दी थी।

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वहीं मंत्री यादव ने इसे अभाव का प्रतीक बताते हुए कहा कि इस पर करोड़ों रुपये खर्च करना उचित नहीं था, और यह राशि सीधे मजदूरों के हित में लगाई जा सकती थी।

योजनाओं और चुनावी दावों पर टकराव
मंत्री यादव ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए दावा किया कि लाखों लोगों को आवास, किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और विभिन्न कल्याण योजनाओं का लाभ मिला है। वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार मजदूरों के लिए ठोस काम नहीं कर पाई।

बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने आगामी चुनावों को लेकर भी अपने-अपने दावे पेश किए, जिससे साफ है कि प्रदेश में सियासी तापमान आने वाले समय में और बढ़ने वाला है।

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