छत्तीसगढ़

सैदा गोदाम में पीडीएस चावल चोरी का बड़ा खुलासा, प्रबंधन और ट्रांसपोर्टर पर मिली भगत के गंभीर आरोप

By Admin|14 Apr 2026, 5:23 PM
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सैदा गोदाम में पीडीएस चावल चोरी का बड़ा खुलासा, प्रबंधन और ट्रांसपोर्टर पर मिली भगत के गंभीर आरोप 

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 सकरी
  सैदा क्षेत्र के शासकीय गोदाम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीबों के लिए आने वाले चावल में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और चोरी का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यह अवैध गतिविधि कोई एक-दो दिन की नहीं, बल्कि विगत कई वर्षों से लगातार संचालित हो रही है, जिसमें कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, नियम स्पष्ट है कि गोदाम में चावल का भंडारण होने के बाद उसे सीधे उचित मूल्य दुकानों तक पहुंचाया जाना चाहिए। लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। आरोप है कि चावल से भरी गाड़ियों को रात के समय जानबूझकर सुनसान स्थानों, पेट्रोल पंपों या अंधेरे इलाकों में खड़ा किया जाता है, जहां से धीरे-धीरे चावल की चोरी कर ली जाती है।

इस पूरे मामले में “लेवर मजदूरों” का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जाती है, जबकि स्थानीय दुकानदारों का मानना है कि यह एक संगठित और सुनियोजित गोरखधंधा है। इसमें बाहर से आए कुछ  ड्राइवरों  की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है, जो इस अवैध गतिविधि हिस्सा बनकर के जरिए तेजी से लाभ कमा रहे हैं।

स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि हर महीने स्टॉक मिलान के दौरान 1से2 क्विंटल चावल कम निकलता है जिससे स्टेज (स्टॉक घाटा) बन जाता है नियम के दबाव के घाटे की भरपाई दुकानदारो को अपनी जेब से करनी पड़ती है जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है 

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सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले की शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही इस गोरखधंधे पर लगाम लग पाई। इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि आखिर किसके संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा है?

उठ रहे बड़े सवाल:

क्या गोदाम प्रबंधन इस पूरे मामले में शामिल है?

ट्रांसपोर्टरों की भूमिका कितनी संदिग्ध है?

संबंधित अधिकारी क्यों चुप्पी साधे हुए हैं?

वर्षों से चल रहे इस गोरखधंधे पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

स्थानीय दुकानदारों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि गरीबों के हक का अनाज खुलेआम लूटा जा रहा है और जिम्मेदार लोग मूकदर्शक बने हुए हैं।

दुकानदारों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके और पीडीएस प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वर्षों से चल रहे इस कथित घोटाले पर कोई निर्णायक कार्रवाई हो पाती है या नहीं।

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