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CG : अनाचार ध्यान से चोटिल होती है आत्मा, मर्यादित जीवन ही आत्मकल्याण की राह : मुनि संवेगरत्न सागर…

By kadwaghut|18 Aug 2026, 1:57 PM
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रायपुर । विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास की चातुर्मासिक प्रवचनमाला में सोमवार को मुनि संवेगरत्न सागर ने जीवन में आचार और मर्यादा को अपनाने का संदेश दिया। मुनि ने कहा कि जीवन में आचार को प्रवेश कराना ही होगा। अनाचार का त्याग कर मर्यादामय जीवन जीने का संकल्प हो तो अनाचार ध्यान हावी नहीं हो सकता।

मुनिश्री ने कहा कि यदि जीवन में अनाचार का सेवन हो जाए तो उसका प्रायश्चित करना चाहिए। हमारी प्राथमिकता सदैव आचार ध्यान की ओर बढ़ने की होनी चाहिए। अनाचार ध्यान आत्मस्वरूप को आहत करता है और इसके परिणामस्वरूप दुख, दुर्गति और पीड़ा ही प्राप्त होती है।

मुनि ने कहा कि जीव के कुसंस्कार होने पर उसे उत्तम निमित्त मिल जाएं, तब भी कुछ नहीं हो सकता। कुसंस्कार जीव को अनाचार ध्यान की ओर प्रेरित करते हैं। अनाचार ध्यान के सेवन के कारण उत्तम निमित्त भी फलीभूत नहीं हो पाते। इसलिए अनाचार ध्यान का विचार मन में आए तो उसे टालने का प्रयास करना चाहिए और जीवन में ऐसे निमित्त मिलें तो उनसे दूरी बनाना ही बुद्धिमानी है।

मुनि ने कहा कि आत्मा के रोग का ज्ञान होने के बाद भी यदि प्रायश्चित नहीं किया और मर्यादित जीवन जीने का प्रयास नहीं किया तो भव सुधार की दिशा में आगे बढ़ना कठिन है। इसके लिए सामान्य सा पराक्रम जागृत करना होगा। बगैर समझे अनाचार ध्यान का सेवन करने वाले व्यक्ति को जब उसके परिणाम सामने आएं तो उन्हें स्वीकार करने का भी पराक्रम रखना चाहिए।

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मुनि ने कहा कि अनाचार ध्यान की साधना जीवन के मूल लक्ष्य को प्रभावित कर रही है। गुरु भगवंत का निमित्त मिलने के बाद भी यदि व्यक्ति सीख ग्रहण नहीं करता और अनाचार में लिप्त रहता है तो आत्मकल्याण के पथ पर चलना संभव नहीं होगा। वहीं, आपके बीच में ऐसे लोग भी हैं जो अद्भुत पराक्रम के साथ आचार ध्यान को अपने जीवन में उतार रहे हैं। आचार ध्यान को स्वीकार किया है। ऐसे उदाहरणों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सुधार की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।

चातुर्मास में तप की श्रृंखला जारी
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया एवं महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि आज नेमीनाथ परमात्मा का जन्म कल्याणक भक्ति भाव के साथ मनाया गया। श्रावक और श्राविकाओं ने प्रभु भक्ति की। धर्मसभा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मुनि भगवंतो से जिनवाणी का ज्ञान ग्रहण कर अपने जीवन को आत्मकल्याण के पथ पर ले जा रहे हैं। चातुर्मास में तप की श्रृंखला भी जारी है। 49 दिवसीय पंच परमेष्ठी श्रेणी तप की आज तीसरी श्रेणी का व्यासना रहा। चौथी श्रेणी 18 अगस्त से प्रारंभ होगी। वहीं गिरनार नेमी तप की श्रृंखला भी जारी है। गिरनार तप के 140 तपस्वियों का व्यासना रहा। सभी ने तप और तपस्वियों की खूब-खूब अनुमोदना की।

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