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राजनांदगांव , नंदई चौक के रहने वाले तामेश्वर बंजारे की कहानी सिर्फ बॉडी बनाने की नहीं, बल्कि जुनून, अनुशासन, संघर्ष से अपनी अलग पहचान बनाने की है। 50 साल की उम्र में भी उनका रोज का करीब ढाई घंटे का अभ्यास और स्पर्धाओं से पहले सुबह-शाम पांच घंटे की मेहनत जारी है। कभी नंदई के देसी अखाड़े में मिट्टी से पहलवानी शुरू कर तामेश्वर आज आधुनिक मशीनों और विदेशी तकनीक से युवाओं को फिटनेस व बॉडी बिल्डिंग की ट्रेनिंग दे रहे हैं। उनके लिए यह खेल सिर्फ शौक नहीं, जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। तामेश्वर ने वर्ष 1995 में नंदई अखाड़े से पहलवानी की शुरुआत की। अंतरराष्ट्रीय बॉडी बिल्डर एके सिंह को देखकर उन्होंने जय भवानी जिम ज्वाइन किया और बॉडी बिल्डिंग की ट्रेनिंग शुरू की।
पुरुषोत्तम आजमानी को गुरु मानते हैं। गुरु से मिली प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने नाग पंचमी पर होने वाली शहर की पारंपरिक शरीर सौष्ठव स्पर्धा की परंपरा को जीवित रखा है। करीब 5 फीट 5 इंच कद और 65 किलो वजन वाले तामेश्वर की पहचान उनकी बेस्ट कॉलर फ्रंट और फोरआर्म्स पोजिंग के लिए भी रही। कल 17 अगस्त को एक्सपर्ट जिम में शाम 8 बजे से बॉडी बिल्डिंग स्पर्धा होगी। शहर में बॉडी बिल्डिंग की यह पहचान नई पीढ़ी के बीच भी बनाए रखने का प्रयास है। अंतरराष्ट्रीय बॉडी बिल्डर एके सिंह को देख जय भवानी जिम की राह पकड़ी।
24 स्पर्धाओं में हिस्सा लेकर आजमाया दम वर्ष 1995 से 2010 के बीच तामेश्वर ने जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की करीब 24 स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। कई बार स्थान हासिल किया। वर्ष 1997 में उन्होंने छत्तीसगढ़ का खिताब जीता। इसके बाद 1998 में छत्तीसगढ़ श्रेष्ठ, छत्तीसगढ़ हरक्यूलिस, मध्यप्रदेश उदय और मिस्टर यूनिवर्सिटी जैसे खिताब अपने नाम किए। 1999 में दोबारा छत्तीसगढ़ श्रेष्ठ का खिताब जीता।
