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एचईसी जमीन विवाद: खाली जमीन बनी अवैध कारोबार का अड्डा, कंपनी को भारी नुकसान

By Admin|22 Jun 2026, 9:42 PM
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रांची
हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) की जमीन अब अवैध निर्माण और किराये के कारोबार का अड्डा बनती जा रही है। कंपनी की खाली पड़ी जमीन पर कब्जा कर कई लोगों ने पक्के मकान, दुकान और छोटे-छोटे व्यावसायिक परिसर तक खड़े कर दिए हैं।

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स्थिति यह है कि जमीन कंपनी की, संसाधन कंपनी के और कमाई किसी और की हो रही है। एचईसी के आवासीय और आसपास के क्षेत्रों में ऐसे सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं, जहां लोग बिना किसी वैध अधिकार के कंपनी की जमीन पर निर्माण कर उसे किराये पर देकर हर माह हजारों रुपये कमा रहे हैं।

इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की बताई जा रही है जिनका एचईसी से प्रत्यक्ष रूप से कोई संबंध नहीं है। कई लोग वर्षों पहले रोजगार की तलाश में रांची आए थे और धीरे-धीरे खाली जमीन पर कब्जा कर स्थायी निवासी बन गए।

किराये से लाखों की कमाई, कंपनी को नुकसान
स्थानीय लोगों के अनुसार, कई अवैध कब्जाधारियों ने एक से अधिक कमरे बनाकर किराये पर दे रखे हैं। कुछ जगहों पर दुकानें, गोदाम और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी संचालित हो रहे हैं।

ऐसे निर्माणों से कब्जाधारियों को हर माह हजारों रुपये की आमदनी हो रही है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि कई मामलों में अवैध निर्माण करने वाले लोग खुद उस परिसर में नहीं रहते।

उन्होंने कंपनी की जमीन पर मकान या दुकान बनाकर किराये पर दे दिया है और दूसरे स्थानों पर रहने लगे हैं। यानी एचईसी की संपत्ति निजी आय का साधन बन गई है।

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बिजली-पानी का भी हो रहा दुरुपयोग
अवैध निर्माण के साथ-साथ बिजली और पानी के कनेक्शन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। कई अवैध बस्तियों और निर्माण स्थलों पर कंपनी के संसाधनों का इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

आरोप है कि कई जगह बिना अनुमति पानी और बिजली की व्यवस्था कर ली गई है। जानकारों का कहना है कि किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान की जमीन पर अवैध कब्जा सिर्फ जमीन का मामला नहीं होता, बल्कि इससे सुरक्षा, भविष्य की विकास योजनाओं और कंपनी की संपत्ति प्रबंधन व्यवस्था पर भी असर पड़ता है।

हजारों एकड़ जमीन की सुरक्षा चुनौती
एचईसी की स्थापना के समय कंपनी को बड़े क्षेत्रफल में जमीन उपलब्ध कराई गई थी। कंपनी के पास करीब हजारों एकड़ जमीन का बड़ा भू-भाग रहा है, जिसमें फैक्ट्री परिसर, आवासीय क्षेत्र और खाली जमीन शामिल हैं।

समय के साथ आर्थिक संकट और निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण कई क्षेत्रों में अतिक्रमण बढ़ता गया। कंपनी के आवासीय परिसर में हजारों क्वार्टर हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में खाली पड़ी जमीनों पर धीरे-धीरे अवैध बस्तियां विकसित हो गईं। कुछ स्थानों पर तो स्थायी बाजार और बहुमंजिली निर्माण तक हो चुके हैं।

नगर प्रशासन विभाग पर भी सवाल
अवैध निर्माण को लेकर एचईसी नगर प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने के कारण कब्जाधारियों के हौसले बढ़ते गए।

कुछ मामलों में विभागीय स्तर पर जांच भी चल रही है। हालांकि कंपनी प्रबंधन समय-समय पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करता रहा है, लेकिन जमीन की निगरानी और अवैध निर्माण रोकना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेगा संकट
एचईसी की जमीन पर बढ़ते अवैध निर्माण को लेकर अब ठोस नीति की जरूरत महसूस की जा रही है। कंपनी की संपत्ति की पहचान, सीमांकन, डिजिटल रिकॉर्ड और नियमित निगरानी के बिना अतिक्रमण रोकना मुश्किल होगा।

एचईसी की जमीन भविष्य की औद्योगिक गतिविधियों और पुनरुद्धार योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में जमीन को अवैध कब्जे और निजी कमाई के साधन से बचाना कंपनी के अस्तित्व और भविष्य दोनों के लिए जरूरी है।

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