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बलौदाबाजार हिंसा केस: अमित बघेल को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, जेल से रिहाई का रास्ता साफ

By kadwaghut|17 Jul 2026, 10:15 PM
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सिंधी समाज टिप्पणी मामले में पहले ही मिल चुकी थी जमानत, अब तीन महीने तक रायपुर आने पर रोक के साथ सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत।

रायपुर। छत्तीसगढ़ क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के अध्यक्ष अमित बघेल को बलौदाबाजार हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत प्रदान कर दी है, जिसके बाद उनकी जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

अमित बघेल पिछले काफी समय से बलौदाबाजार हिंसा प्रकरण में न्यायिक हिरासत में थे। इससे पहले उन्हें सिंधी समाज के भगवान पर की गई कथित टिप्पणी से जुड़े मामले में भी जमानत मिल चुकी थी। अब सुप्रीम कोर्ट से बलौदाबाजार हिंसा मामले में भी राहत मिलने के बाद उनके सभी प्रमुख मामलों में जमानत मिल गई है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए कुछ शर्तें भी लगाई हैं। अदालत ने निर्देश दिया है कि अमित बघेल अगले तीन महीने तक रायपुर जिले की सीमा में प्रवेश नहीं करेंगे। साथ ही उन्हें जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करना होगा तथा जमानत की अन्य सभी शर्तों का पालन करना होगा।

गौरतलब है कि बलौदाबाजार हिंसा की घटना ने पूरे प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा बटोरी थी। मामले में कई लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की गई थी, जिनमें अमित बघेल भी शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद उनके समर्थकों में खुशी का माहौल है। वहीं, अब उनकी रिहाई की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।

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क्या है बलौदाबाजार हिंसा मामला?

बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में 10 जून 2024 को हुई हिंसा राज्य की चर्चित घटनाओं में शामिल रही। यह घटना उस समय हुई, जब दशहरा मैदान में एक सामाजिक मुद्दे को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए थे।

आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान मंच से दिए गए कुछ भड़काऊ भाषणों के बाद भीड़ उग्र हो गई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स तोड़ दिए और कलेक्टोरेट तथा पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय परिसर में प्रवेश कर गए।

उग्र भीड़ ने परिसर में व्यापक तोड़फोड़ और आगजनी की। कई सरकारी और निजी वाहनों में आग लगा दी गई, जबकि कलेक्टोरेट भवन सहित अन्य सरकारी संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा।

हिंसा के दौरान हालात पर काबू पाने की कोशिश कर रहे पुलिस अधिकारियों और जवानों पर पत्थरों, लाठियों और लोहे की रॉड से हमला किए जाने का भी आरोप है। इस हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए दंगा, आगजनी, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, शासकीय कार्य में बाधा डालने और पुलिस पर हमला सहित विभिन्न धाराओं में कई लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए। जांच के दौरान अनेक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें छत्तीसगढ़ क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के अध्यक्ष अमित बघेल भी शामिल थे।

यह मामला लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया में रहा। अब सुप्रीम कोर्ट ने अमित बघेल को इस मामले में जमानत दे दी है, 

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