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ईरान-अमेरिका संघर्ष में भारतीय युवक की जान गई, वैश्विक तनाव बढ़ा

By Admin|14 Jul 2026, 7:41 PM
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नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष से लगभग पूरी दुनिया किसी ना किसी तरह से प्रभावित हो रही है। इस जंग में अब तक कई लोगों ने अपनी जान गंवा दी है और कई अब भी लोग दहशत में जी रहे हैं। इस बीच अब इस जंग ने बिहार के एक युवक की जान ले ली है। अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान हुए हमले में सोमवार की रात गोपालगंज जिले के थावे थाना क्षेत्र के विदेशी टोला गांव के एक युवक की मौत हो गई। मृतक गांव के निवासी और जूता-चप्पल व्यवसायी संजय गुप्ता का 30 वर्षीय पुत्र सोनू कुमार था।

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घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों ने बताया कि सोनू कुमार गुप्ता पिछले दो वर्षों से दुबई में एक शिप पर कार्यरत था। सोमवार की रात उसके सहकर्मियों ने फोन कर हादसे की जानकारी दी। सहकर्मियों के अनुसार, ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिक बेस को निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों के दौरान शिप पर आग का गोला और मलबा आ गिरा। इसकी चपेट में आने से सोनू कुमार गुप्ता की मौत हो गई। सहकर्मियों ने यह भी बताया कि क्षेत्र में लगातार हो रहे हवाई हमलों के कारण वे दहशत में हैं और अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

जंग में अब रूस की एंट्री
इधर अमेरिका और ईरान के बढ़ते सैन्य तनाव के बीच रूस ने रूस ने अपना सबसे सुरक्षित और आधुनिक हवाई कमांड विमान टीयू-214पीयू (डूम्सडे प्लेन) तेहरान भेजा है। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा की रिपोर्ट के अनुसार, विमान मॉस्को वनुकोवो से रवाना हुआ और सीधे तेहरान इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा। यह विमान रूस के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक मोबाइल कमांड सेंटर के रूप में कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो राष्ट्रपति की यात्रा और चलते-फिरते सरकारी कार्यों में सहायता के लिए समर्पित रेडियो और संचार प्रणालियों से सुसज्जित है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस विमान की ईरान में मौजूदगी केवल कूटनीतिक संयोग नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है।

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दोनों देशों को लाभ होगा: ईरान को रूस की अत्याधुनिक खुफिया क्षमता सैटेलाइट ट्रैकिंग डेटा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सुरक्षा का सीधा लाभ मिलेगा, जिससे अमेरिकी हवाई हमलों से निपटने में उसकी रक्षात्मक प्रणाली और मजबूत होगी। वहीं, रूस इसके जरिए यूक्रेन मोर्चे से वैश्विक ध्यान भटकाने और मध्य-पूर्व के महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों पर अपना रणनीतिक प्रभाव और पकड़ मजबूत करने में सफल हो सकता है।

विमान तैनाती के मायने
1. रूस ने स्पष्ट किया है कि वह मध्य-पूर्व में ईरान को अकेला नहीं छोड़गा। अमेरिका के एफ-35 जेट्स और युद्धपोतों की तैनाती के जवाब में रूस का डूम्सडे विमान भेजना वाशिंगटन के लिए कड़ा संदेश है।

2. यह कदम दर्शाता है कि पश्चिम के खिलाफ वैश्विक मंच पर एक मजबूत रक्षा गठबंधन आकार ले रहा है, जो अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती दे रहा है।

3. बहरीन, कुवैत और जॉर्डन जैसे देशों में बने अमेरिकी बेस से उसे मिसाइल का अलर्ट मिल जाता है। अब रूसी विमान की एंट्री से मध्य-पूर्व का संकट क्षेत्रीय नहीं, बल्कि एक ­बहुपक्षीय महाशक्ति संघर्ष में बदल सकता है।

4. होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। यहां फिर पूर्ण युद्ध छिड़ता है तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे।

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