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राजा रघुवंशी मर्डर केस में बड़ा दिन, सोनम रघुवंशी की जमानत पर आज सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

By Admin|14 Jul 2026, 3:02 PM
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इंदौर 

देश भर में चर्चित रहे राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने राज्य सरकार से सोनम को गिरफ्तारी के समय उपलब्ध कराए गए गिरफ्तारी के आधार के तथ्यों की प्रति पेश करने को कहा है।

मामले में ट्रायल कोर्ट ने सोनम को इस आधार पर जमानत दी थी कि गिरफ्तारी के समय उसे कानून के अनुसार गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध नहीं कराए गए थे। बाद में मेघालय हाईकोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखा। हालांकि राज्य सरकार का दावा है कि गिरफ्तारी के आधार बताए गए थे और विवाद केवल एक टाइपिंग की गलती का है। दस्तावेज में हत्या से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के स्थान पर गलती से धारा 403(1) अंकित हो गई थी, जबकि बीएनएस में ऐसी कोई धारा मौजूद नहीं है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार की याचिका पर सोनम की जमानत पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा था कि प्रारंभिक तौर पर ऐसा नहीं लगता कि यह ऐसा मामला है, जिसमें गिरफ्तारी के आधार बिल्कुल नहीं बताए गए हों। चूंकि सोनम जमानत पर रिहा हो चुकी है और उसने राज्य सरकार की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था, इसलिए अदालत ने अंतरिम राहत देने से परहेज किया। 

सुप्रीम कोर्ट अब अगली सुनवाई में विस्तार से यह जांच करेगा कि कानून के मुताबिक सोनम को गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध कराए गए थे या नहीं।

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इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार की याचिका पर तत्काल जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि, जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने मौखिक रूप से कहा था कि पहली नजर में हाईकोर्ट द्वारा मामले को जिस तरीके से निपटाया गया, उस पर उन्हें आपत्ति है।

बेंच ने यह भी कहा था कि पहली नजर में ऐसा नहीं लगता कि यह ऐसा मामला है, जिसमें गिरफ्तारी के आधार बिल्कुल नहीं दिए गए हों।

इसके बावजूद कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाने से इसलिए परहेज किया, क्योंकि सोनम पहले ही जमानत पर रिहा हो चुकी है, कुछ समय जेल में बिता चुकी है और उसने मेघालय सरकार की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा था- टाइपिंग की गलती से बदली धारा
इससे पहले सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कोर्ट के सामने कहा- गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में हत्या से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) की जगह गलती से धारा 403(1) लिख दी गई थी। यह टाइपो एरर है। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर जमानत दी है। मजिस्ट्रेट ने आरोपी को गिरफ्तारी के आधार समझाए थे। ट्रांजिट रिमांड देते समय भी इसका रिकॉर्ड मौजूद है।

उन्होंने कहा- पहले इसी मामले में जमानत मेरिट के आधार पर खारिज हो चुकी थी। बाद में इस तकनीकी गलती को आधार बनाकर राहत दे दी गई, जबकि सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि ऐसी लिपिकीय गलती, जिससे आरोपी को कोई वास्तविक नुकसान न हुआ हो, जमानत का आधार नहीं बन सकती।

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कोर्ट ने पूछा था- गलत धारा लिखने के कारण जमानत देना सही?
जस्टिस सुंदरेश ने सोनम की तरफ से पेश वकील से पूछा था कि गिरफ्तारी के आधार पहले ही बताए जा चुके थे। शुरुआती जमानत याचिकाओं में यह मुद्दा कभी नहीं उठाया गया। फिर अचानक इसी तकनीकी आधार पर जमानत कैसे मांगी गई? क्या केवल गलत धारा लिखे जाने के कारण हाईकोर्ट का जमानत देना सही फैसला था? इस पर सोनम के वकील ने दावा किया कि सोनम को कभी गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए। तब जस्टिस सुंदरेश ने कहा- यदि ऐसा था तो यह आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई गई?

कोर्ट ने कहा- अगर सोनम रिहा नहीं हुई होती तो हम जमानत पर रोक लगा देते। यदि आवश्यक है तो राज्य सरकार कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

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