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तेल संकट के बाद इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ा रुझान, चार्जिंग स्टेशनों की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा

By Admin|12 Jul 2026, 12:12 PM
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अंबेडकरनगर
 कम खर्च में अधिक माइलेज देने वाले प्रदूषण रहित इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर पिछले तीन वर्षों में काफी रुझान बढ़ा है। बीते दिनों तेल संकट के बाद इसमें और तेजी आई। हालांकि, सफर के दौरान चार्जिंग प्वाइंट नहीं होने से बीच रास्ते में फंसने की चिंता से अभी खरीदारी और उपयोग महज नगरों तक सीमित रह गया है।

कारों के सापेक्ष बाइक में अधिक लाभ मिलने पर लोग इसे खूब खरीद रहे हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 18 कार व 403 बाइक पंजीकृत है। कार की खरीदारी गत 2023-24 से शुरू हुई। वहीं, बाइक की 2018 से चल रही है। हाल के दिनों में इसमें उछाल आया।

ग्राहकों में असमंजस
इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने में अभी ग्राहकों में असमंजस है। अखंड मिश्र ने बताया कि डीजल, पेट्रोल एवं सीएनजी से संचालित वाहनों में रास्ते में ईंधन भरवाने को लेकर ज्यादा संकट नहीं होता है। सीएनजी के साथ पेट्रोल का भी विकल्प मिलता है। इलेक्ट्रिक वाहनों में वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था नहीं है।

अविनाश कुमार कहते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए रास्ते में चार्जिंग प्वाइंट नहीं मिलते हैं। लखनऊ या पूर्वांचल की ओर जाते समय इसकी चिंता रहती है। माइलेज भले ही अधिक है, लेकिन रास्ते में इसकी चार्जिंग खत्म होने पर डीजल या पेट्रोल भराने का विकल्प नहीं है।

सिद्धांत पांडेय बताते हैं कि मोटर पर आधारित इन वाहनों के खराब होने पर मरम्मत की दिक्कत भी हो सकती है। सफर में सुविधाएं और संसाधन होने पर इससे बेहतर वाहन नहीं होगा। इसके संचालन व सर्विसिंग का खर्च भी नाममात्र है। यह प्रदूषण रहित होने से पर्यावरण मित्र भी है।

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सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी सत्येंद्र यादव ने बताया कि पिछले तीन वर्ष से ईवी की खरीदारी तेज हुई है।

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