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राजनांदगांव : ड्राइंग-डिजाइन में चूक,भवनों को जोड़ना भूले, नतीजा- सीसीएच का काम पिछड़ा…

By kadwaghut|12 Jul 2026, 10:55 AM
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राजनांदगांव , मेडिकल कॉलेज अस्पताल के ठीक सामने करीब 16 करोड़ की लागत से बन रहे क्रिटिकल केयर अस्पताल का काम तीन सालों में पूरा नहीं हो सका। ड्राइंग डिजाइन में मेडिकल कॉलेज अस्पताल और नए क्रिटिकल केयर अस्पताल (सीसीएच) भवन को कनेक्ट करने की प्लानिंग नहीं थी। मरीजों को भीतर के रास्ते से दोनों भवनों तक लाने ले जाने की समस्या को ध्यान में रख बाद में प्लानिंग कर दोनों अस्पतालों को जोड़ा गया। इस कारण क्रिटिकल केयर अस्पताल का काम पिछड़ता चला गया जो तीन साल में नहीं बन सका है।

पेंड्री में करीब 16.63 लाख रुपए की लागत से 50 बेड का पांच मंजिला क्रिटिकल केयर अस्पताल का निर्माण कार्य वर्तमान में तेजी से चल रहा है। यहां आईसीयू सहित अन्य सुविधाएं रहेगी। जून 2025 में इसका निर्माण पूरा होने का दावा किया गया था। यहां मेडिसिन, गायनिक, सर्जरी विभाग रहेगा। अस्पताल भवन में रैंप, 2 लिफ्ट, पार्किंग, ओटी और इमरजेंसी सेवाएं रहेगी। 7 करोड़ खर्च कर आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। निर्माण काम में तेजी तो आई लेकिन फिनिशिंग का काम बाकी होने से शुभारंभ के लिए इंतजार करना होगा।

सीजी एमएमसी इसका निर्माण कर रही है। दल्ली राजहरा की कंस्ट्रक्शन कंपनी को काम दिया गया है। शुरूआती दिनों में खोदाई करने के दौरान मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन की पानी की पाइप लाइन, बिजली, इंटरनेट के केबल क्षतिग्रस्त होते रहे इस कारण काम धीमा हो गया। इसके बाद फायर सेफ्टी सिस्टम, पाइप लाइन, ड्रेनेज और बिजली से संबधित कामों में देरी के कारण काम पिछड़ गया। अब यहां मेडिकल मशीनरी, उपकरण और अन्य मशीनें लगाने में और समय लग सकता है। इससे बिल्डिंग को हैंडओवर करने में देरी हो सकती है।

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बिजली कंपनी के ईई कौशलेन्द्र पांडे का कहना है ट्रांसफार्मर लगाने आवेदन और राशि जमा की गई है तो मामला प्रक्रिया में होगा। तत्काल फाइल मंगा कर जानकारी लेता हूं जल्द ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। दोनों अस्पताल भवनों का कनेक्शन अलग-अलग रहेगा। बिजली गुल की समस्या नहीं रहेगी। मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन मशीन है। एमआरआई मशीन अब लगने वाली है ऐसे में वहां लोड ज्यादा रहता है। नए अस्पताल में भी मेडिकल मशीनरी रहेगी इसका लोड सहन करने यहां नया ट्रांसफार्मर लगा कर नए अस्पताल में अलग सप्लाई दी जाएगी।

सीजी एमएससी के सब इंजीनियर गौरव साहू का कहना है प्रदेश में कई क्रिटिकल केयर अस्पताल बन रहे भूमि और पुराने अस्पताल भवनों के अनुसार सभी की ड्राइंग डिजाइन अलग है। पहले यहां मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग व इस अस्पताल को कनेक्ट करने की प्लानिंग नहीं थी। यह निर्णय बाद में लिया गया लेकिन दोनों अस्पतालों को भीतर से जोड़ने का काम पूरा कर लिया गया। यहां 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। ट्रांसफार्मर लगाने बिजली कंपनी में राशि जमा की गई। बिजली आते ही फाइनल टेस्टिंग कर बिल्डिंग हैंड ओवर कर दी जाएगी।

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