छत्तीसगढ़

CG : रायपुर में बड़ा हादसा: प्राचीन बावड़ी में खेलते-खेलते डूबे दो मासूम …

By kadwaghut|11 Jul 2026, 4:41 PM
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धरसीवां। राजधानी रायपुर के धरसीवां क्षेत्र स्थित कुंबरगढ़ के प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर परिसर में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। मंदिर परिसर की प्राचीन बावड़ी में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों बच्चों के शवों को बाहर निकालकर पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से बावड़ी के आसपास सुरक्षा इंतजाम करने की मांग उठाई है। जानकारी के अनुसार, कुंबरगढ़ स्थित प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर परिसर में वर्षों पुरानी बावड़ी है, जहां आसपास के बच्चे अक्सर खेलने के लिए आते हैं। शनिवार को भी रोज की तरह कई बच्चे मंदिर परिसर में खेल रहे थे।

इसी दौरान साक्षी साहू (7 वर्ष), पिता योगेश साहू और श्रवण धीवर (4 वर्ष), पिता भूपेंद्र धीवर खेलते-खेलते बावड़ी के पास पहुंच गए। बताया जा रहा है कि दोनों बच्चे किसी तरह बावड़ी के पानी में उतर गए और गहरे पानी में चले गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब तक आसपास मौजूद लोगों को बच्चों के डूबने की जानकारी मिली, तब तक काफी देर हो चुकी थी। स्थानीय लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन बावड़ी में पानी की गहराई करीब 25 से 30 फीट होने के कारण दोनों बच्चों को समय रहते बाहर नहीं निकाला जा सका। कुछ देर बाद दोनों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना मिलते ही धरसीवां पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने दोनों बच्चों के शवों का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में मातम पसरा हुआ है और हर कोई इस दर्दनाक घटना से स्तब्ध है।

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स्थानीय लोगों के अनुसार, कुंबरगढ़ की यह प्राचीन बावड़ी ऐतिहासिक महत्व रखती है। मान्यता है कि प्राचीन काल में राजा कुंबरसिंह के शासनकाल के दौरान उनकी रानी भी इस बावड़ी का उपयोग करती थीं। वर्षों से यह बावड़ी गांव की पहचान रही है, लेकिन अब तक यहां इस तरह की कोई बड़ी दुर्घटना सामने नहीं आई थी। पहली बार हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। हादसे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बावड़ी के चारों ओर मजबूत जाली या सुरक्षा रेलिंग लगाई जाए, ताकि भविष्य में कोई बच्चा या अन्य व्यक्ति दुर्घटना का शिकार न हो। लोगों का कहना है कि मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और बच्चे आते हैं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है। चेतावनी बोर्ड लगाने और खतरनाक स्थानों को सुरक्षित करने की भी मांग की जा रही है।

धरसीवां थाना प्रभारी राजेंद्र दीवान ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। आवश्यक पंचनामा कार्रवाई पूरी कर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सार्वजनिक और ऐतिहासिक जल स्रोतों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि बावड़ी के चारों ओर पहले से सुरक्षा घेरा या जाली लगी होती, तो शायद दो मासूम बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।

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