DPR छत्तीसगढ समाचाररायपुर जिला

CG : नारायणपुर का नया सवेरा : ईंट-गारे के भवनों से लिखी जा रही ग्रामीण सशक्तिकरण की नई इबारत

By kadwaghut|10 Jul 2026, 4:02 PM
f X W

रायपुर,

नारायणपुर का नया सवेरा: ईंट-गारे के भवनों से लिखी जा रही ग्रामीण सशक्तिकरण की नई इबारत
नारायणपुर का नया सवेरा: ईंट-गारे के भवनों से लिखी जा रही ग्रामीण सशक्तिकरण की नई इबारत
नारायणपुर का नया सवेरा: ईंट-गारे के भवनों से लिखी जा रही ग्रामीण सशक्तिकरण की नई इबारत

बस्तर अंचल का नारायणपुर जिला आज बदलाव की एक जीवंत मिसाल बनकर उभर रहा है। कभी विकास की कड़ियों से कोसों दूर दिखने वाले इस क्षेत्र की तस्वीर अब बदलने लगी है। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग द्वारा निर्मित आधुनिक शासकीय भवन केवल कंक्रीट के ढांचे नहीं हैं, बल्कि ये ग्रामीणों की उम्मीदों, महिलाओं की आत्मनिर्भरता और नौनिहालों के भविष्य को गढ़ने वाले सशक्त केंद्र बन चुके हैं।
​कलेक्टर के मार्गदर्शन में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा और आजीविका के क्षेत्रों में किए गए इन अधोसंरचना विकास कार्यों ने शासन की जनहितैषी योजनाओं को सीधे ग्रामीणों के घर-आंगन तक पहुंचा दिया है। 
​ 
दीदियों के सपनों को मिले आत्मनिर्भरता के पंख

     ​नारायणपुर के बेनूर गांव में 24.70 लाख रुपये की लागत से बना ‘महतारी सदन’ आज ग्रामीण महिलाओं की तकदीर बदल रहा है। यह सदन महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) के लिए सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का पावरहाउस है।यहां महिलाएं विभिन्न स्थानीय उत्पादों का निर्माण, पैकेजिंग और कौशल विकास का प्रशिक्षण ले रही हैं।जो महिलाएं कभी आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भर थीं, वे आज स्वरोजगार के दम पर अपने परिवारों की रीढ़ बन चुकी हैं।
​ 
गोपालकों की समृद्धि का नया ठिकाना

      ​जिले के पशुपालकों और किसानों की बड़ी चिंता को दूर करते हुए खनिज संस्थान न्यास (DMFT) निधि से 66.48 लाख रुपये की लागत से एक भव्य एवं आधुनिक जिला पशु चिकित्सालय भवन का निर्माण किया गया है। इस अस्पताल में पशुओं के इलाज और सर्जरी के लिए आधुनिक मशीनें और सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब ग्रामीणों को अपने मवेशियों के इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ता। स्थानीय स्तर पर ही त्वरित और बेहतर इलाज मिलने से पशुधन सुरक्षित हो रहा है, जिससे डेयरी और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।
​
संकट में घिरी महिलाओं का ‘सुरक्षा कवच’

READ ALSO  CG : सपत्नीक तीर्थराज पुष्कर पहुंचे सांसद बृजमोहन अग्रवाल, भगवान ब्रह्मा और मां सावित्री के किए दर्शन ...

     ​महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत 50 लाख रुपये की लागत से तैयार ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ जिले की महिलाओं के लिए एक मजबूत संबल बनकर उभरा है। किसी भी प्रकार की हिंसा या विपरीत परिस्थितियों से पीड़ित महिलाओं को अब न्याय और सहायता के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। इस केंद्र में एक ही छत के नीचे कानूनी सलाह, आपातकालीन चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक परामर्श और अस्थाई आश्रय की सुविधा मिल रही है, जिसने बस्तर की महिलाओं में सुरक्षा की भावना और आत्मविश्वास को दोगुना कर दिया है।
​
बारिश और धूप से बेखौफ गढ़ रहे भविष्य

     ​नीति आयोग के विशेष सहयोग से एड़समेटा जैसे दूरस्थ क्षेत्र में 23.33 लाख रुपये की लागत से ‘ट्यूब्यूलर स्कूल शेड’ का निर्माण किया गया है, जिसने बुनियादी शिक्षा का ढांचा ही बदल दिया। पहले जहां कड़े मौसम (कड़कती धूप और भारी बारिश) में बच्चों की पढ़ाई बाधित हो जाती थी, वहीं अब इस सुरक्षित शेड ने उन्हें एक बेहतरीन शैक्षणिक माहौल दिया है। स्कूल में बच्चों की उपस्थिति में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और अंदरूनी इलाकों के बच्चों को भी अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पा रही है।

​विकास की नई पहचान बनता नारायणपुर

      ​नारायणपुर जिले में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के माध्यम से किए गए ये सुनियोजित निर्माण कार्य इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि सही नीयत और सटीक योजना से बदलाव कैसे लाया जाता है। महिलाओं की सशक्तिकरण, बेजुबान पशुओं की सेवा, संकटग्रस्त बहनों को सुरक्षा और नौनिहालों को सुरक्षित शिक्षा देकर नारायणपुर आज छत्तीसगढ़ के विकास मानचित्र पर अपनी एक नई और सुनहरी पहचान दर्ज करा रहा है। यह सफर केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण का नहीं, बल्कि लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का महायज्ञ है।

READ ALSO  CG : छत्तीसगढ़ में 12 DSP बने ASP, गृह विभाग ने जारी किया आदेश; देखें पूरी लिस्ट ...
अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button