छत्तीसगढ़

शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में 7 आरोपियों को राहत, सशर्त अग्रिम जमानत मंजूर

By Admin|08 Jul 2026, 8:11 PM
f X W

बिलासपुर.

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने धमतरी जिले की वर्ष 2007 की शिक्षाकर्मी ग्रेड-3 भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़े 18 साल पुराने मामले में सात आरोपियों को अग्रिम जमानत दे दी है.

जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बैंच ने कहा कि इसी मामले में समान आरोपों वाले अन्य सह-आरोपियों को पहले ही राहत मिल चुकी है, इसलिए वर्तमान याचिकाकर्ताओं को भी जमानत का लाभ दिया जाना उचित है. कोर्ट ने सात अलग-अलग आपराधिक अपीलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है.

क्या था शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाला ?
दरअसल, वर्ष 2007 में जनपद पंचायत मगरलोड में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के 172 पदों पर भर्ती प्रक्रिया हुई थी. आरोप है कि चयन समिति के सदस्यों और अन्य आरोपियों ने साजिश के तहत कुछ अभ्यर्थियों के फर्जी या अमान्य दस्तावेजों के आधार पर अंक बढ़ाकर उन्हें चयनित करा दिया, इसके चलते पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिली और वे बाहर हो गए. इस संबंध में वर्ष 2011 में पुलिस थाना मगरलोड में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(9)(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया था.

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कहा कि पूरी चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत कई समितियों और स्क्रीनिंग प्रक्रिया के बाद हुई थी. करीब 5,000 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनकी अलग-अलग स्तर पर जांच के बाद अंतिम चयन सूची बनाई गई थी. अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया, पुलिस ने ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ताओं ने किसी आपराधिक षड्यंत्र में भाग लिया था. फर्जीवाड़ा की शिकायत, किसी अज्ञात व्यक्ति की ओर से कई वर्ष बाद की गई और इसी मामले के अन्य सह-आरोपियों को पहले ही हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है.

READ ALSO  राजनांदगांव : खुद को तपाकर हीरा बनाएं और दूसरों के आदर्श बनें: समयप्रभ...

हाई कोर्ट ने सातों याचिकाकर्ताओं को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, याचिकाकर्ताओं को शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाला मामले में गिरफ्तार किया जाता है तो उन्हें 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक-एक जमानतदार पर रिहा किया जाए. हाई कोर्ट ने यह भी शर्त लगाई है, सभी आरोपी जांच में सहयोग करेंगे, गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे, ट्रायल में नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे और भविष्य में इसी तरह का कोई अपराध नहीं करेंगे. साथ ही उन्हें 25 जुलाई 2026 को विवेचना अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है. यदि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो राज्य सरकार अथवा शिकायतकर्ता जमानत निरस्त कराने के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे.

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button