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झारखंड में कर्मचारियों की प्रमोशन प्रक्रिया बदली, नए नियमों का सचिवालय सेवा संघ ने किया विरोध

By Admin|07 Jul 2026, 2:41 PM
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रांची
झारखंड सरकार ने राज्यकर्मियों की प्रोन्नति (प्रमोशन) से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है. अब राज्यकर्मी प्रोबेशन अवधि पूरी होने के बाद ही प्रोन्नति के लिए पात्र होंगे. यानी प्रोबेशन अवधि समाप्त होने के बाद ही प्रोन्नति के लिए निर्धारित न्यूनतम सेवा अवधि की गणना शुरू होगी. कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने सोमवार को इस संबंध में संशोधित संकल्प जारी कर दिया. इस प्रस्ताव को दो जुलाई को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिली थी.

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प्रोबेशन के बाद ही जुड़ेगी प्रोन्नति की सेवा अवधि
सरकार की ओर से जारी संशोधित संकल्प के अनुसार, जिन मूल पदों पर दो वर्ष की प्रोबेशन अवधि निर्धारित है और अगले पद पर प्रोन्नति के लिए दो या तीन वर्ष की सेवा अवधि तय है, वहां अब दोनों अवधियां अलग-अलग मानी जाएंगी. यानी पहले कर्मचारी को प्रोबेशन अवधि पूरी करनी होगी, उसके बाद ही प्रोन्नति के लिए निर्धारित सेवा अवधि की गणना शुरू होगी.

चार साल बाद मिलेगी पहली प्रोन्नति
नये प्रावधान के तहत यदि किसी कर्मचारी का मूल पद 4800 रुपये ग्रेड पे का है और प्रथम प्रोन्नति 5400 रुपये ग्रेड पे वाले पद पर होनी है, जहां प्रोन्नति के लिए दो वर्ष की सेवा अवधि निर्धारित है तथा मूल पद पर दो वर्ष का प्रोबेशन है, तो अब कर्मचारी को पहली प्रोन्नति के लिए कुल चार वर्ष की सेवा पूरी करनी होगी. पहले दो वर्ष प्रोबेशन में बीतेंगे और उसके बाद दो वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने पर ही वह प्रोन्नति के लिए पात्र होगा.

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सरकार ने बताया संशोधन का कारण
राज्य सरकार ने संशोधित संकल्प में कहा है कि वर्तमान व्यवस्था में कई सेवाओं में प्रोबेशन अवधि और प्रोन्नति के लिए निर्धारित सेवा अवधि लगभग एक साथ पूरी हो रही थी, जो प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं माना गया. इसी विसंगति को दूर करने के उद्देश्य से नियमों में संशोधन किया गया है.

जहां नियम नहीं, वहां लागू होगा संशोधित संकल्प
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन ग्रेड पे के बीच प्रोन्नति की अवधि वर्ष 2014 के संकल्प में निर्धारित नहीं है, वहां बीच के सभी स्तरों की निर्धारित सेवा अवधि जोड़कर पात्रता तय की जाएगी. वहीं जिन सेवा नियमावलियों में पहले से प्रोन्नति की अलग व्यवस्था है, वहां वही नियम प्रभावी रहेंगे. जिन सेवाओं में ऐसी व्यवस्था नहीं है, वहां वर्ष 2014 के संशोधित संकल्प के प्रावधान लागू होंगे.

सचिवालय सेवा संघ ने किया विरोध
इधर, झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने सरकार के इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है. संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर संशोधित संकल्प को तत्काल निरस्त करने का आग्रह किया है. संघ का कहना है कि वर्ष 2014 में जारी संकल्प संख्या-3286 का उद्देश्य विभिन्न सेवा संवर्गों में प्रोन्नति के लिए सेवा अवधि में एकरूपता लाना था. नए संशोधन से यह व्यवस्था प्रभावित होगी और अलग-अलग सेवा संवर्गों के बीच फिर असमानता की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी.

2014 के बाद अब बदलाव की क्या जरूरत: संघ
संघ ने सवाल उठाया है कि वर्ष 2014 से लागू व्यवस्था में 12 वर्ष बाद संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ी. संघ के अनुसार, संशोधित नियम लागू होने पर अन्य सेवाओं के कर्मचारियों को जहां लेवल-7 से लेवल-8 में प्रोन्नति के लिए केवल दो वर्ष की प्रतीक्षा करनी होगी, वहीं झारखंड सचिवालय सेवा के अधिकारियों को आठ वर्ष तक इंतजार करना पड़ेगा. संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि संशोधित नियम पर तत्काल रोक लगाकर पुराने प्रावधान को ही लागू रखा जाए, ताकि सभी सेवा संवर्गों के कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित हो सके.

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