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Veer Bal Diwas 2025: साहिबजादों की वीरता और बलिदान की अमिट कहानी

By Priyanshu|26 Dec 2025, 5:58 PM
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Veer Bal Diwas 2025: 26 दिसंबर भारतीय इतिहास में एक विशेष दिन के रूप में दर्ज है। यह दिन हमें साहस, त्याग और अडिग आस्था की याद दिलाता है। पूरे देश में इसे वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि हमें यह सिखाता है कि डर के सामने कभी झुकना नहीं चाहिए और धर्म व संस्कृति के लिए हमेशा दृढ़ रहना चाहिए।

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Veer Bal Diwas 2025 का इतिहास

वीर बाल दिवस सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों – अजीत सिंह, जूझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह – की निर्भीकता और बलिदान को याद करने के लिए मनाया जाता है। ये नन्हे साहिबजादे मुगलों के अत्याचार के बावजूद अपने धर्म और विश्वास से कभी भी समझौता नहीं किया।

साहिबजादों का अदम्य साहस

साल 1705 की बात है। मुगलों ने गुरु गोबिंद सिंह जी से बदला लेने के लिए सरसा नदी पर हमला किया, और इस दौरान गुरु जी का परिवार उनसे बिछड़ गया। छोटे साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह अपनी माता गुजरी के साथ गुप्त रूप से मोरिंडा चले गए।

लेकिन रात को उनका रहस्य रसोईया गंगू ने नवाब वजीर खान को बता दिया। नवाब ने साहिबजादों को पकड़ा और उन्हें सर्दियों की कड़क ठंड में ठंडे बुर्ज में कैद कर दिया। तीन दिन तक माता गुजरी ने उन्हें धर्म और साहस की शिक्षा दी, कि कभी भी अपने विश्वास को मत छोड़ो।

जिंदा दीवार में चुनवाया गया बलिदान

7 और 9 साल से भी कम उम्र के साहिबजादों ने नवाब वजीर खान के सामने न तो सिर झुकाया और न ही धर्म बदला। इससे गुस्साए नवाब ने 26 दिसंबर 1705 को उन्हें जिंदा दीवार में चुनवा दिया। यह केवल शहादत नहीं थी, बल्कि सत्य और धर्म पर अडिग रहने की मिसाल भी थी।

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खालसा पंथ और साहिबजादों का बलिदान

साल 1699 में बैसाखी के दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की। उनके चारों पुत्र भी इस दीक्षा में शामिल हुए। इसके बाद मुगल शासकों ने गुरु जी को पकड़ने के लिए अभियान शुरू किया। संघर्ष के दौरान दो बड़े साहिबजादे – अजीत सिंह और जूझार सिंह – युद्धभूमि में वीरगति को प्राप्त हुए, जबकि छोटे साहिबजादों को उनकी माता के साथ गुप्त रूप से सुरक्षित रहने की कोशिश थी।

प्रेरणा आज भी बच्चों और युवाओं के लिए

26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाने की घोषणा प्रधानमंत्री ने 9 जनवरी 2022 को की थी। यह दिन हमें साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान और साहस की याद दिलाता है और पीढ़ियों को धैर्य और निडरता की प्रेरणा देता है।

गुरु गोबिंद सिंह कौन थे?

गुरु गोबिंद सिंह सिखों के दसवें गुरु थे। वे एक महान दार्शनिक, कवि, योद्धा और लेखक थे। उनका जन्म 1666 में पटना में हुआ था। वे नौवें सिख गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर और माता गुजरी के इकलौते पुत्र थे।

साल 1699 में बैसाखी के दिन उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की और पांच व्यक्तियों को ‘पांच प्यारे’ के रूप में अमृत चखा कर शामिल किया। यह कदम समाज में जात-पात भेदभाव को खत्म करने और समानता का संदेश देने के लिए उठाया गया।

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